लखनऊ से एक अहम कानूनी फैसला सामने आया है, जहां की लखनऊ बेंच ने बिजली कनेक्शन को व्यक्ति के मौलिक अधिकार से जोड़ते हुए बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि बिजली जैसी बुनियादी सुविधा से किसी को भी वंचित नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह गरिमापूर्ण जीवन का हिस्सा है|
बिजली कनेक्शन को बताया मौलिक अधिकार
कोर्ट ने अपने फैसले में का हवाला देते हुए कहा कि जीवन के अधिकार में बिजली जैसी आवश्यक सेवाएं भी शामिल हैं। ऐसे में किसी व्यक्ति को बिना उचित कारण के बिजली से वंचित करना उसके अधिकारों का उल्लंघन माना जाएगा।
यह आदेश रायबरेली की एक महिला की याचिका पर सुनाया गया, जो पिछले करीब 20 वर्षों से अपने घर में रह रही थी, लेकिन पारिवारिक विवाद के चलते उसका बिजली कनेक्शन काट दिया गया था। महिला ने अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद मामले की सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बिजली विभाग द्वारा याचिका खारिज करने के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही विभाग को निर्देश दिया गया कि संबंधित महिला को 4 हफ्तों के भीतर नया बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया जाए।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पारिवारिक विवाद जैसे कारणों से किसी व्यक्ति की बुनियादी सुविधाओं को नहीं छीना जा सकता। यह फैसला न केवल इस मामले के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।
इस निर्णय के बाद बिजली विभाग और अन्य प्रशासनिक एजेंसियों के लिए भी स्पष्ट संदेश है कि वे नागरिकों के मूल अधिकारों का सम्मान करें और किसी भी स्थिति में आवश्यक सेवाओं को बाधित न करें।



