भारत के 9 ऐसे मंदिर जहां देवी-देवता को अर्पित होती है शराब
भारत का धार्मिक परिदृश्य केवल फूल, दीपक और मिठाई तक सीमित नहीं है। देश के कुछ मंदिरों में ऐसे भी अनोखे रीति-रिवाज देखे जा सकते हैं, जहां देवी-देवता को शराब अर्पित करना पूजा का एक अहम हिस्सा माना जाता है। ये परंपराएँ स्थानीय संस्कृति, तांत्रिक मान्यताओं और लोकविश्वास से जुड़ी हैं और सदियों से चली आ रही हैं।
1. काल भैरव मंदिर, उज्जैन (मध्य प्रदेश)
उज्जैन के काल भैरव को नगर का रक्षक माना जाता है। यहां श्रद्धालु तांत्रिक रीति-रिवाजों के अनुसार भैरव को शराब अर्पित करते हैं। माना जाता है कि इससे भय और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और सुरक्षा का आभास बढ़ता है।
2. खबीस बाबा की मजार, सीतापुर (उत्तर प्रदेश)
खबीस बाबा की मजार पर शराब अर्पित करने की परंपरा सूफी आस्था और लोकविश्वास का अनोखा संगम है। श्रद्धालु मानते हैं कि बाबा को शराब अर्पित करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है।
3. परसिनिक्कडवू मंदिर, कन्नूर (केरल)
कन्नूर जिले में स्थित इस मंदिर में लोकदेवता मुथप्पन को मछली, मांस और ताड़ी के साथ भोग अर्पित किया जाता है। स्थानीय आदिवासी परंपरा के अनुसार, देवता को उनके जैसा समझकर भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है।
4. माता उत्तरेश्वरी मंदिर, जगतसिंहपुर (ओडिशा)
ओडिशा के इस मंदिर में देवी को वाइन और मछली का भोग दिया जाता है। स्थानीय विश्वास के अनुसार, यह भोग बीमारियों से राहत दिलाने में मदद करता है और अर्पित सामग्री बाद में जरूरतमंदों में बांट दी जाती है।
5. काल भैरव मंदिर, वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
वाराणसी में काल भैरव को काशी का कोतवाल माना जाता है। यहां श्रद्धालु शराब और मांस अर्पित करते हैं। बिना काल भैरव की पूजा किए धार्मिक कार्य अधूरा माना जाता है।
6. काल भैरव मंदिर, दिल्ली
दिल्ली के पुराने किले के पास स्थित यह मंदिर भी शराब भोग के लिए जाना जाता है। यहाँ विभिन्न आयु के लोग इस परंपरा का पालन करते हैं और इसे लोक आस्था का एक अहम हिस्सा मानते हैं।
7. जीवा मामा मंदिर, वडोदरा (गुजरात)
वडोदरा में स्थित यह मंदिर लोकनायक जीवा मामा को समर्पित है। जीवा मामा को शराब और सिगरेट पसंद थी, इसलिए श्रद्धालु उन्हें यही भोग अर्पित करते हैं। यह मंदिर समाज के बलिदान और लोककथाओं का प्रतीक भी है।
8. भंवाल माता मंदिर, मेरता (राजस्थान)
यहां माता केवल ढाई प्याला शराब स्वीकार करती हैं। पुजारी इसे विशेष विधि से अर्पित करते हैं। स्थानीय आस्था में इसे चमत्कारिक और शुभ माना जाता है।
9. भद्रकाली मंदिर, अमृतसर (पंजाब)
अमृतसर में भद्रकाली मंदिर हर साल मई में मेला आयोजित करता है। इस दौरान माता को शराब और मांस अर्पित किया जाता है, जिसे बाद में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। यह परंपरा सामूहिक आस्था और स्थानीय संस्कृति का प्रतीक मानी जाती है। भारत में धार्मिक परंपराएँ केवल फूल और मिठाई तक सीमित नहीं हैं। कुछ मंदिरों में शराब भोग की प्रथा सदियों से जीवित है। ये अनोखी परंपराएँ धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं और भारत की लोक आस्था की विविधता को उजागर करती हैं।
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