1 फरवरी 2026 को संगम में डुबकी, पूरे माघ महीने के स्नान के बराबर पुण्य
प्रयागराज में आयोजित होने वाला माघ मेला भारत के सबसे प्राचीन और पवित्र धार्मिक आयोजनों में से एक है। वर्ष 2026 में माघ मेले का विशेष आकर्षण माघ पूर्णिमा का अमृत स्नान, जो 1 फरवरी 2026 को संपन्न होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन संगम में स्नान करने से पूरे माघ महीने तक प्रतिदिन स्नान करने के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। यही कारण है कि इस दिन लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में आस्था की डुबकी लगाने पहुंचते हैं।
माघ पूर्णिमा स्नान क्यों है इतना विशेष?
हिंदू धर्मग्रंथों और पुराणों में माघ पूर्णिमा का विशेष उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि इस दिन देवी-देवता स्वयं पृथ्वी पर आते हैं और त्रिवेणी संगम में स्नान, जप और तप करते हैं। कहा जाता है कि माघ पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों का जल अमृत के समान हो जाता है। इसलिए इस दिन किया गया स्नान साधारण स्नान नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और मोक्ष की ओर एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
गंगाजल में भगवान विष्णु का वास
पुराणों के अनुसार, माघ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं। इस कारण इस दिन गंगा स्नान का महत्व और भी बढ़ जाता है। धार्मिक विश्वास है कि इस दिन केवल गंगाजल का स्पर्श मात्र भी व्यक्ति को स्वर्ग समान फल देता है। यह भी कहा जाता है कि भगवान विष्णु माघ पूर्णिमा के व्रत, दान और उपवास से अधिक प्रसन्न स्नान से होते हैं।
माघ पूर्णिमा 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार,
माघ पूर्णिमा प्रारंभ: 1 फरवरी 2026, सुबह 5:52 बजे
माघ पूर्णिमा समाप्त: 2 फरवरी 2026, सुबह 3:38 बजे
अमृत स्नान के शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:54 से 6:17 तक
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:12 से 12:57 तक
शुभ समय: सुबह 8:31 से दोपहर 12:35 तक
धार्मिक दृष्टि से ब्रह्म मुहूर्त में किया गया स्नान सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।
रविदास जयंती का संयोग
इस वर्ष माघ पूर्णिमा के दिन संत रविदास जयंती भी पड़ रही है, जिससे इस दिन का आध्यात्मिक महत्व और बढ़ जाता है। संत रविदास सामाजिक समरसता, भक्ति और समानता के प्रतीक माने जाते हैं। ऐसे में माघ पूर्णिमा पर संगम स्नान और संत रविदास को स्मरण करना श्रद्धालुओं के लिए विशेष पुण्यकारी माना जाता है।
माघ मेला 2026 की अंतिम प्रमुख स्नान तिथि, माघ पूर्णिमा के बाद भी श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण स्नान शेष रहता है, महाशिवरात्रि (अंतिम स्नान): 15 फरवरी 2026, रविवार l महाशिवरात्रि के दिन संगम स्नान के साथ भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व है। इसी दिन माघ मेले का विधिवत समापन होता है।
श्रद्धालुओं के लिए आस्था और अनुशासन का पर्व
माघ मेला केवल स्नान का आयोजन नहीं, बल्कि संयम, साधना और आध्यात्मिक जीवन का प्रतीक है। कल्पवास करने वाले श्रद्धालु पूरे महीने संयमित जीवन जीते हैं, सत्संग करते हैं और दान-पुण्य में भाग लेते हैं। माघ पूर्णिमा का स्नान इस संपूर्ण साधना का शिखर माना जाता है। 1 फरवरी 2026 को माघ पूर्णिमा का अमृत स्नान श्रद्धालुओं के लिए दुर्लभ आध्यात्मिक अवसर है। मान्यता है कि इस दिन संगम में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में शांति, पुण्य व सद्गति प्राप्त होती है। यही कारण है कि माघ पूर्णिमा का स्नान माघ मेले का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण स्नान माना जाता है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान को करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ या विद्वान की सलाह अवश्य लें।
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