सेलेनियम और जिंक क्यों हैं उतने ही जरूरी? 

आज के समय में थायराइड एक आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। पहले यह बीमारी अधिकतर वयस्कों में देखी जाती थी, लेकिन अब युवा, महिलाएं और यहां तक कि बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। आम धारणा यह है कि थायराइड से बचाव के लिए केवल आयोडीन युक्त नमक का सेवन ही काफी है, लेकिन यह पूरी सच्चाई नहीं है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और आयुर्वेद दोनों मानते हैं कि थायराइड ग्रंथि के सही काम के लिए आयोडीन के साथ-साथ सेलेनियम और जिंक की भी अहम भूमिका होती है।

थायराइड ग्रंथि क्या करती है?

थायराइड एक छोटी सी ग्रंथि है जो गले के सामने स्थित होती है, लेकिन इसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है। यह ग्रंथि मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा स्तर, वजन, हार्मोन संतुलन और मानसिक स्वास्थ्य तक को प्रभावित करती है। थायराइड मुख्य रूप से दो हार्मोन बनाती है-
T3 (ट्राईआयोडोथायरोनिन) और T4 (थायरॉक्सिन)।
इन हार्मोन्स का संतुलन बिगड़ते ही शरीर में कई समस्याएं शुरू हो जाती हैं।

क्या सिर्फ आयोडीन ही काफी है?

आयोडीन थायराइड हार्मोन बनाने के लिए जरूरी है, इसमें कोई शक नहीं। आयोडीन की कमी से गॉइटर और हाइपोथायराइडिज्म जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लेकिन समस्या तब होती है, जब शरीर में आयोडीन तो होता है, लेकिन बाकी जरूरी पोषक तत्व नहीं होते। आधुनिक रिसर्च बताती है कि केवल आयोडीन लेने से थायराइड हमेशा संतुलित नहीं रहता, क्योंकि हार्मोन का निर्माण और उनका सही उपयोग दोनों अलग प्रक्रियाएं हैं।

सेलेनियम: T4 को T3 में बदलने वाला मिनरल

सेलेनियम थायराइड के लिए बेहद महत्वपूर्ण ट्रेस मिनरल है। थायराइड ग्रंथि जो T4 हार्मोन बनाती है, वह अपने आप में निष्क्रिय होता है। शरीर को असली फायदा T3 हार्मोन से मिलता है।

सेलेनियम की भूमिका:

निष्क्रिय T4 को सक्रिय T3 में बदलता है, थायराइड ग्रंथि को ऑक्सीडेटिव डैमेज से बचाता है, इम्यून सिस्टम को संतुलित रखता है, अगर शरीर में सेलेनियम की कमी हो, तो पर्याप्त आयोडीन होने के बावजूद थायराइड सही तरीके से काम नहीं कर पाता।

जिंक: हार्मोन को पहचानने में मददगार

जिंक को अक्सर इम्युनिटी से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन थायराइड में इसकी भूमिका भी उतनी ही अहम है।

जिंक के फायदे:

थायराइड हार्मोन रिसेप्टर्स को सक्रिय करता है, कोशिकाओं को हार्मोन पहचानने और उपयोग करने में मदद करता है, थकान, बाल झड़ना और कमजोरी जैसे लक्षणों को कम करता है, अगर जिंक की कमी हो, तो शरीर में हार्मोन होने के बावजूद उनके प्रभाव दिखाई नहीं देते।

आयुर्वेद की नजर से थायराइड

आयुर्वेद के अनुसार, थायराइड केवल हार्मोन की बीमारी नहीं है, बल्कि यह अग्नि (मेटाबॉलिज्म) के कमजोर होने का संकेत है। इसे कफ और मेद धातु के असंतुलन से जोड़ा जाता है। जब शरीर में विषाक्त पदार्थ जमा होने लगते हैं, तो गले में सूजन, भारीपन, आवाज बैठना और निगलने में परेशानी जैसी समस्याएं सामने आती हैं।

थायराइड के लिए फायदेमंद प्राकृतिक उपाय

आयुर्वेद और पोषण विज्ञान दोनों कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ सुझाते हैं जो थायराइड को सपोर्ट कर सकते हैं:

मेथी का पानी – मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है

हरा धनिया – शरीर से टॉक्सिन निकालने में मदद करता है

कद्दू के बीज – जिंक और सेलेनियम का अच्छा स्रोत

नट्स और बीज – हार्मोन बैलेंस में सहायक

थायराइड से बचाव या नियंत्रण के लिए केवल आयोडीन पर निर्भर रहना सही रणनीति नहीं है। थायराइड ग्रंथि को स्वस्थ रखने के लिए आयोडीन, सेलेनियम और जिंक तीनों का संतुलन जरूरी है। जब ये तीनों मिलकर काम करते हैं, तभी थायराइड हार्मोन सही तरीके से बनते, सक्रिय होते और शरीर द्वारा उपयोग किए जाते हैं। संतुलित आहार, सही पोषण और समय-समय पर जांच यही थायराइड से जुड़ी समस्याओं से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।

Disclaimer : यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। थायराइड से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए योग्य डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें। TARANG VOICE इसका पुष्टि नहीं करता

यह भी देखे

https://www.tarangvoice.com/lala-lajpat-rai-a-symbol-of-courage-and-patriotism/

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here