नोरा फतेही और संजय दत्त के गाने ने मचाया हंगामा
कन्नड़ फिल्म ‘केडी: द डेविल’ का गाना “सरके चुनर तेरी सरके” इन दिनों विवादों के बीच छाया हुआ है। गाने का वीडियो रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर आलोचना का तूफान शुरू हो गया। लोग गाने के बोलों और डांस मूव्स को अश्लील मान रहे हैं। विशेष रूप से गाने में इस्तेमाल किए गए डबल मीनिंग शब्द और प्रोवोकटिव डांस ने दर्शकों को झकझोर दिया।फिल्ममेकर ओनिर ने इस विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और सीधे सेंसर बोर्ड को भी निशाने पर लिया। उनका कहना है कि बोर्ड ऐसे अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट को कैसे मंजूरी दे देता है। ओनिर ने तंज कसते हुए कहा, “सेंसर बोर्ड तो घूसखोर पंडित जैसी फिल्मों के नाम बदलने में बिजी है, लेकिन ऐसे गाने से किसी को कोई दिक्कत नहीं होती। हम कैसा देश बनते जा रहे हैं, जहां वैलेंटाइन डे और इंटरफेथ शादियों पर विवाद होता है, लेकिन अश्लीलता पर कोई रोक नहीं?”
सोशल मीडिया पर गुस्सा और आलोचना
सिंगर अरमान मलिक ने भी इस गाने की आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि गाने के बोल सुनकर उन्हें यकीन नहीं हुआ और यह देखकर दुख हुआ कि कमर्शियल गानों का स्तर इतना नीचे गिर गया है। उन्होंने कहा, “काश मैं इसे अनसुना कर पाता।” गाने का सेट एक डांस बार जैसा दिखाया गया है, जहां नोरा फतेही बैकअप डांसर्स के बीच अपने लटके-झटकों का जलवा बिखेर रही हैं। गाने का म्यूजिक अरजुन जन्या ने दिया है और लिरिक्स राकिब आलम ने लिखे हैं। वीडियो के वायरल होते ही लोगों ने गाने की अश्लीलता पर अपनी नाराजगी व्यक्त की।
सेंसर बोर्ड पर उठे सवाल
ओनिर ने इस विवाद को सेंसर बोर्ड की दोहरी नीति पर भी एक बड़ा तंज बताया। उनका कहना है कि कुछ फिल्मों के नाम बदलने पर बोर्ड तुरंत कार्रवाई कर देता है, जबकि अश्लील और आपत्तिजनक गानों को बिना किसी रोक के रिलीज कर दिया जाता है। उन्होंने इस पूरे मामले को देश के वर्तमान माहौल और सेंसरशिप की कमजोरियों का उदाहरण बताया।
फिल्म और समाज पर असर
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के गाने न केवल दर्शकों के लिए अपमानजनक हैं, बल्कि समाज पर भी गलत संदेश छोड़ते हैं। कमर्शियल फिल्म इंडस्ट्री में अश्लीलता बढ़ने से युवा दर्शक और आम जनता प्रभावित हो रहे हैं। ओनिर और अरमान मलिक जैसी हस्तियों की प्रतिक्रिया इस दिशा में जरूरी चेतावनी भी मानी जा रही है। “सरके चुनर तेरी सरके” विवाद इस बात को दर्शाता है कि फिल्म और संगीत उद्योग में अश्लीलता और सेंसरशिप के बीच संतुलन बिगड़ रहा है। दर्शकों और फिल्ममेकरों की प्रतिक्रिया से साफ है कि लोग इस तरह के कंटेंट को स्वीकार नहीं कर रहे। ओनिर ने जो सवाल उठाए हैं, वे न केवल सेंसर बोर्ड बल्कि पूरे समाज के लिए महत्वपूर्ण संकेत हैं।
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