मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में बड़े बजट और दीर्घकालिक योजनाओं पर जोर
राष्ट्रीय राजधानी New Delhi में यमुना नदी की सफाई और पुनर्जीवन के लिए व्यापक स्तर पर काम किया जा रहा है। रेखा गुप्ता के नेतृत्व में सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक सफाई अभियान नहीं, बल्कि राजधानी के पर्यावरणीय भविष्य से जुड़ा दीर्घकालिक संकल्प है। योजनाओं को नीति स्तर से लेकर जमीनी अमल तक सख्ती से लागू किया जा रहा है।
सीवेज प्रबंधन पर फोकस
दिल्ली में 37 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) कार्यरत हैं। इनमें से 28 को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड किया जा चुका है, जबकि शेष इकाइयों के उन्नयन का कार्य प्रगति पर है। इन संयंत्रों का उद्देश्य है कि यमुना में जाने वाले गंदे पानी को पहले शुद्ध किया जाए, ताकि प्रदूषण का स्तर कम हो। नई तकनीकों के माध्यम से उपचारित पानी को पुन: उपयोग योग्य बनाने की दिशा में भी प्रयास हो रहे हैं। इससे न केवल नदी को राहत मिलेगी, बल्कि जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
हजारों करोड़ का बजट प्रावधान
यमुना पुनर्जीवन को गति देने के लिए सरकार ने ₹9000 करोड़ का जल एवं स्वच्छता बजट तय किया है। इसके अतिरिक्त ₹1816 करोड़ विशेष रूप से यमुना मिशन के लिए निर्धारित किए गए हैं। यह राशि सीवेज नेटवर्क के विस्तार, नालों के सुधार और प्रदूषण नियंत्रण उपायों पर खर्च की जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि बिना शोधन का पानी यमुना में न पहुंचे और शहर का सीवेज तंत्र मजबूत बने।
ड्रेनेज सिस्टम में ऐतिहासिक बदलाव
करीब 50 वर्षों बाद ₹57,362 करोड़ की लागत से नया ड्रेनेज मास्टर प्लान लागू किया गया है। इस योजना के तहत जल निकासी ढांचे को सुदृढ़ बनाने, वर्षा जल प्रबंधन को बेहतर करने और बाढ़ की समस्या कम करने पर जोर दिया गया है। नालों के पुनर्विकास और सीवेज सिस्टम के आधुनिकीकरण से यमुना में प्रदूषित जल के सीधे प्रवाह को रोका जा सकेगा।
निगरानी और जनसहभागिता
सरकार ने परियोजनाओं की समय-समय पर समीक्षा की व्यवस्था की है। अवैध सीवेज कनेक्शन और औद्योगिक अपशिष्ट की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जा रही है। साथ ही, नागरिकों को भी जल संरक्षण और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं।
स्वच्छ भविष्य की ओर कदम
यमुना दिल्ली की जीवनरेखा है। इसे स्वच्छ और संरक्षित रखना पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। वर्तमान प्रयासों से उम्मीद है कि आने वाले समय में नदी की स्थिति में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। यदि योजनाएं निर्धारित समयसीमा में पूरी होती हैं, तो यह पहल अन्य शहरों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है।
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