Gold-Silver Prices Crash: रिकॉर्ड हाई से 11% फिसला सोना, चांदी 16% टूटी – जानिए गिरावट के 5 बड़े कारण
कई महीनों की शानदार तेजी के बाद अब सोने और चांदी के दाम में जबरदस्त गिरावट देखने को मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना अपने रिकॉर्ड हाई से करीब 11% टूट चुका है, जबकि चांदी 16% से ज्यादा फिसल गई है। भारत में भी दोनों कीमती धातुओं के दाम नीचे आ रहे हैं।
निवेशकों के लिए यह गिरावट एक सवाल बन गई है — क्या यह सोने-चांदी में खरीदारी का मौका है या आगे और गिरावट आ सकती है? आइए जानते हैं कीमतों में आई गिरावट के 5 बड़े कारण।
1. सेफ-हेवन की मांग में कमी
अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापारिक तनाव में नरमी आने के बाद निवेशकों ने सोना-चांदी जैसी सुरक्षित एसेट्स (Safe-Haven Assets) से पैसा निकालना शुरू कर दिया है।
निवेशक अब फिर से इक्विटी मार्केट और हाई-रिस्क इन्वेस्टमेंट्स की ओर रुख कर रहे हैं।
इसी का असर यह है कि
गोल्ड का अंतरराष्ट्रीय दाम $3,900 प्रति औंस से नीचे आ गया है,
जबकि सिल्वर $46 प्रति औंस के नीचे फिसल चुकी है।
अपने उच्चतम स्तर पर सोना $4,381 और चांदी $54 प्रति औंस तक पहुंची थी। इस तरह सोने में 11% और चांदी में करीब 16% की गिरावट आई है।
2. सेंट्रल बैंक की पॉलिसी पर नजर
ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स की नजर इस हफ्ते अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मीटिंग पर है।
कई विशेषज्ञों का मानना है कि फेड इस मीटिंग में एक और ब्याज दर कटौती (Rate Cut) कर सकता है।
आम तौर पर ब्याज दरों में गिरावट से सोने को सपोर्ट मिलता है क्योंकि इसका निवेश पर ब्याज नहीं मिलता, लेकिन अगर ग्लोबल ग्रोथ मजबूत रहती है, तो इसका असर सीमित रह सकता है।
इसके अलावा, यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) और बैंक ऑफ जापान (BoJ) से भी किसी बड़ी नीति बदलाव की उम्मीद नहीं है, जिससे सोने-चांदी पर सकारात्मक असर नहीं दिख रहा है।
3. भारतीय बाजार में ग्लोबल असर
भारत में भी अंतरराष्ट्रीय रुझानों का सीधा प्रभाव देखा गया है।
MCX (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर 24 कैरेट सोना लगभग ₹1.18 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड हो रहा है।
डॉलर की मजबूती और मुनाफावसूली के चलते सोने के दाम पर दबाव बना हुआ है।
India Bullion & Jewellers Association (IBJA) की वाइस प्रेसिडेंट अक्षा कंबोज का कहना है —
“सोना अब भी सेफ-हेवन एसेट है, लेकिन फिलहाल निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। सभी को स्पष्ट संकेतों का इंतजार है।”
वहीं, चांदी ₹1.40 लाख प्रति किलो तक गिर गई है। चांदी की कीमतों पर इंडस्ट्रियल डिमांड में कमजोरी और निवेशक सेंटिमेंट दोनों का असर पड़ा है।
4. कमजोर औद्योगिक मांग
चांदी एक साथ इंडस्ट्रियल और प्रेशियस मेटल दोनों है।
हाल के महीनों में इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर एनर्जी और ऑटो सेक्टर से डिमांड में कमी आई है, जिससे सिल्वर की कीमत पर दबाव बढ़ा है।
कमोडिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि निकट भविष्य में चांदी की कीमतें स्थिर रह सकती हैं, लेकिन
“गिरावट पर खरीदारी” (Buy on Dips) की रणनीति लंबी अवधि के निवेशकों के लिए लाभदायक हो सकती है।
5. लॉन्ग टर्म नजरिया अभी भी पॉजिटिव
हालिया गिरावट के बावजूद, 2025 में सोना अब तक लगभग 53% रिटर्न दे चुका है।
अक्टूबर में इसने $4,381 प्रति औंस का नया ऑल-टाइम हाई बनाया था।
इस उछाल के पीछे मुख्य कारण रहे —
सेंट्रल बैंकों की बढ़ी हुई खरीदारी,
भू-राजनीतिक तनाव,
ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें।
इसी तरह, सिल्वर भी इस साल टॉप परफॉर्मिंग कमोडिटीज में शामिल रही है।
क्लीन एनर्जी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर से बढ़ती मांग ने इसे सपोर्ट दिया है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि लॉन्ग टर्म में गोल्ड और सिल्वर दोनों में निवेश का दमखम अभी भी बना हुआ है।
गोल्ड और सिल्वर की हालिया गिरावट निवेशकों के लिए चिंता की बात जरूर है, लेकिन यह पैनिक करने का नहीं, बल्कि समझदारी से कदम उठाने का समय है।
जो निवेशक लंबी अवधि के नजरिए से सोचते हैं, उनके लिए यह गिरावट एक अच्छा एंट्री पॉइंट साबित हो सकती है।
कमोडिटी मार्केट में उतार-चढ़ाव सामान्य हैं, लेकिन सोना और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश लंबे समय में हमेशा स्थिरता और रिटर्न देते आए हैं।






