लखनऊ: एक अप्रैल 2005 के बाद नियमित हुए अस्थायी और वर्कचार्ज कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ देने के मामले में Allahabad High Court की लखनऊ खंडपीठ ने अहम आदेश दिया है। अदालत ने फिलहाल इस मामले में एकल पीठ के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिससे राज्य सरकार को बड़ी राहत मिली है।

यह आदेश दो जजों की पीठ जस्टिस ने दिया। उन्होंने लोक निर्माण विभाग (PWD) की ओर से दाखिल करीब 40 विशेष अपीलों पर एक साथ सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।

दरअसल, 4 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट की एकल पीठ ने अपने फैसले में कहा था कि अस्थायी और वर्कचार्ज कर्मचारियों की पूरी सेवा अवधि को जोड़कर उन्हें पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया जाए, भले ही उनकी नियमित नियुक्ति 1 अप्रैल 2005 के बाद हुई हो। इसी आदेश को राज्य सरकार ने चुनौती दी थी।

सरकार की ओर से अदालत में दलील दी गई कि एकल पीठ का फैसला पहले से मौजूद खंडपीठ के निर्णयों के खिलाफ है। खास तौर पर ‘अशोक तिवारी’ मामले का हवाला देते हुए कहा गया कि एकल पीठ को खंडपीठ के फैसलों को गलत ठहराने का अधिकार नहीं है।

इसके अलावा सरकार ने यह भी बताया कि जिन फैसलों के आधार पर एकल पीठ ने अपना आदेश दिया था, उनमें से कुछ को बाद में खंडपीठ द्वारा रद्द किया जा चुका है। इस वजह से भी एकल पीठ का निर्णय टिकाऊ नहीं माना जा सकता।

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह भी रखा गया कि उत्तर प्रदेश पेंशन संशोधन अधिनियम 2021 की वैधता का मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। ऐसे में इस मुद्दे की संवेदनशीलता और भी बढ़ जाती है।

खंडपीठ ने प्रारंभिक तौर पर माना कि यह मामला काफी जटिल और महत्वपूर्ण कानूनी सवालों से जुड़ा हुआ है। इसलिए इस पर विस्तृत सुनवाई की जरूरत है। इसी आधार पर अदालत ने एकल पीठ के आदेश पर फिलहाल रोक लगाते हुए सभी अपीलों को 27 अप्रैल 2026 को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया है।

कुल मिलाकर, हाईकोर्ट के इस फैसले से फिलहाल राज्य सरकार को राहत मिली है, जबकि इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय अब अगली सुनवाई के बाद ही सामने आएगा।

 

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