केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने बताया देश में बिजली उत्पादन क्षमता और भविष्य की ऊर्जा योजनाएं

देश के कई हिस्सों में इन दिनों एलपीजी गैस सिलेंडर की सीमित सप्लाई की खबरें सामने आ रही हैं। शहरों से लेकर गांवों तक कई लोग खाना बनाने के लिए गैस के विकल्प तलाश रहे हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग बिजली से चलने वाले इंडक्शन चूल्हों का इस्तेमाल करने लगे हैं। इससे लोगों के मन में यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर ज्यादा लोग बिजली से खाना बनाने लगेंगे तो क्या देश में बिजली की कमी हो सकती है। इस मुद्दे पर केंद्रीय बिजली तथा आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने साफ कहा है कि देश में बिजली की आपूर्ति को लेकर किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि भारत के पास बिजली उत्पादन की क्षमता मांग से काफी ज्यादा है और जरूरत पड़ने पर उत्पादन को और बढ़ाया जा सकता है।

बिजली उत्पादन क्षमता मांग से काफी ज्यादा

केंद्रीय मंत्री के अनुसार इस समय देश में कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 5,24,000 मेगावाट से अधिक है। वहीं हाल ही में दर्ज की गई पीक डिमांड करीब 2,36,000 मेगावाट रही है। इसका मतलब यह है कि भारत के पास मौजूदा मांग से दोगुनी से भी अधिक बिजली उत्पादन क्षमता मौजूद है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 12 मार्च 2026 को देश में लगभग 4676 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ, जो उस दिन की कुल मांग से अधिक था। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने बिजली क्षेत्र में कई सुधार किए हैं, जिसके कारण मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर काफी कम हो गया है। जहां पहले यह अंतर लगभग 5.5 प्रतिशत तक पहुंच जाता था, वहीं अब यह घटकर लगभग 0.1 प्रतिशत रह गया है।

नवीकरणीय ऊर्जा पर बढ़ रहा है जोर

सरकार अब पारंपरिक बिजली उत्पादन के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों पर भी तेजी से काम कर रही है। पहले देश का ध्यान मुख्य रूप से थर्मल पावर यानी कोयले से बनने वाली बिजली पर था, लेकिन अब सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और जल विद्युत जैसे विकल्पों पर भी तेजी से निवेश किया जा रहा है। हालांकि सौर और पवन ऊर्जा की अपनी सीमाएं भी हैं। सौर ऊर्जा केवल दिन के समय ही बन सकती है और पवन ऊर्जा हवा की उपलब्धता पर निर्भर करती है। इसलिए सरकार भविष्य में परमाणु ऊर्जा को भी मजबूत विकल्प के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है।

परमाणु ऊर्जा की क्षमता बढ़ाने की योजना

वर्तमान में भारत में परमाणु ऊर्जा से करीब 8 गीगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है और लगभग 12 गीगावाट की परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता में बड़ा विस्तार किया जाए। योजना के अनुसार देश में 2027 तक परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को 100 गीगावाट तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए राज्यों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है कि वे अपने यहां परमाणु बिजली घर स्थापित करने की दिशा में पहल करें।

जल विद्युत परियोजनाओं पर भी काम तेज

सरकार जल विद्युत परियोजनाओं के विस्तार पर भी काम कर रही है। खासतौर पर जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में सिंधु, झेलम और चेनाब नदियों पर नए हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स की संभावनाओं पर काम चल रहा है। कई पुराने जलाशयों में जमा गाद को हटाने का काम भी शुरू किया गया है ताकि उनकी भंडारण क्षमता बढ़ाई जा सके और बिजली उत्पादन में सुधार हो। इसके साथ ही इन नदियों के पानी को पंजाब और अन्य राज्यों तक पहुंचाने की योजनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।

बिजली वितरण में सुधार और स्मार्ट मीटर योजना

बिजली वितरण कंपनियों की स्थिति सुधारने के लिए सरकार कई कदम उठा रही है। पिछले दशक में बिजली वितरण कंपनियों के तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान में काफी कमी आई है। जहां पहले यह नुकसान 23–24 प्रतिशत तक था, वहीं अब यह लगभग 16 प्रतिशत तक आ गया है। साथ ही देशभर में स्मार्ट मीटर लगाने की योजना भी तेजी से आगे बढ़ रही है। इन मीटरों के जरिए उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत की जानकारी आसानी से मिल सकेगी और वितरण कंपनियों को भी बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी।

ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और तकनीक पर फोकस

ऊर्जा क्षेत्र में नई तकनीक, निवेश और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए इस महीने दिल्ली में एक बड़े ऊर्जा सम्मेलन का आयोजन भी किया जा रहा है। इसमें कई देशों के प्रतिनिधि और ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियां हिस्सा लेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में बिजली की मांग तेजी से बढ़ेगी, लेकिन सरकार की योजनाओं और नई परियोजनाओं के चलते देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना संभव होगा। इसलिए फिलहाल इंडक्शन चूल्हों के बढ़ते उपयोग से बिजली संकट की संभावना बेहद कम मानी जा रही है।

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