‘बस मेरा नाम मत बदलना’  जब रेमो डिसूजा ने अपनाया नया धर्म

बॉलीवुड के मशहूर कोरियोग्राफर और निर्देशक रेमो डिसूजा और उनकी पत्नी लिजेल डिसूजा ने हाल ही में अपनी धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक यात्रा को लेकर खुलकर बात की। इस बातचीत में दोनों ने बताया कि उनका घर किसी एक धर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि वहां हर आस्था को समान सम्मान दिया जाता है। रेमो जन्म से हिंदू हैं, लेकिन बाद में उन्होंने ईसाई धर्म अपनाया। वहीं उनकी पत्नी लिजेल कैथोलिक परिवार से आती हैं। बावजूद इसके, दोनों का मानना है कि धर्म से ज्यादा महत्वपूर्ण इंसानियत और आस्था का भाव है।

घर में हर धर्म का सम्मान

रेमो और लिजेल के घर में विभिन्न धर्मों के प्रतीक मौजूद हैं। घर में मदर मैरी और भगवान बुद्ध की प्रतिमाएं हैं, तो वहीं गणेश जी और भगवान शिव के लिए विशेष मंदिर भी बना है। यह दर्शाता है कि उनका परिवार धार्मिक विविधता को अपनाने और सम्मान देने में विश्वास रखता है। लिजेल का कहना है कि वह जन्म से कैथोलिक हैं और उनकी परवरिश भी उसी परंपरा में हुई है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में उनका झुकाव हिंदू धर्म की ओर बढ़ा है। खासकर अपने माता-पिता के निधन के बाद उन्होंने पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में अधिक रुचि लेनी शुरू की।

क्या है रेमो डिसूजा का असली नाम?

रेमो डिसूजा का असली नाम रमेश गोपी नायर है। फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने के बाद उन्होंने अपना नाम बदला, लेकिन अपने परिवार और जड़ों से जुड़ाव बनाए रखा। उन्होंने उस समय को याद किया जब उन्होंने अपने माता-पिता को बताया कि वह ईसाई धर्म अपनाना चाहते हैं। रेमो के अनुसार, उन्हें उम्मीद थी कि उनके माता-पिता इस फैसले का विरोध करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

पिता की एक खास शर्त

रेमो ने बताया कि जब उन्होंने अपने पिता से धर्म परिवर्तन की बात कही, तो उनके पिता ने बड़ी सहजता से कहा, “ठीक है, लेकिन बस मेरा नाम मत बदलना।” यही वजह है कि आज उनका नाम रेमो गोपी डिसूजा है। इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि उनके परिवार में धार्मिक निर्णयों को लेकर खुलापन और समझ थी।

बच्चों के नाम को लेकर दिलचस्प किस्सा

रेमो और लिजेल ने अपने बड़े बेटे का नाम एडोनिस रखा था। हालांकि, रेमो के माता-पिता के लिए यह नाम बोलना थोड़ा मुश्किल था, इसलिए बच्चे का एक हिंदू नाम ‘ध्रुव’ भी रखा गया। बाद में बड़े होने पर बेटे ने एडोनिस नाम को ही अपनाए रखने का फैसला किया। यह किस्सा उनके परिवार में परंपरा और आधुनिकता के संतुलन को दर्शाता है।

धर्म से परे आध्यात्मिक जुड़ाव

रेमो और लिजेल दोनों का मानना है कि धर्म किसी एक पहचान तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनकी आस्था का दायरा व्यापक है। साल 2025 में यह कपल महाकुंभ मेले में शामिल हुआ था, जहां उन्होंने प्रयागराज के संगम में डुबकी लगाई। इसके अलावा, वे तिरुपति बालाजी मंदिर भी दर्शन करने गए थे। इन अनुभवों की झलक उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा की, जिसे उनके प्रशंसकों ने काफी पसंद किया। रेमो डिसूजा और लिजेल की कहानी यह दिखाती है कि धर्म और आस्था का अर्थ सीमाओं में बंधना नहीं, बल्कि सम्मान और समझ के साथ जीना है। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि अलग-अलग धार्मिक पृष्ठभूमि के लोग भी एक साथ प्रेम और सामंजस्य के साथ जीवन जी सकते हैं। रेमो का यह अनुभव हमें सिखाता है कि नाम, पहचान और परंपरा के साथ जुड़ाव बनाए रखते हुए भी व्यक्ति अपनी आध्यात्मिक राह चुन सकता है।

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