मोजतबा ख़ामेनेई का पहला बयान: ईरान के नए सुप्रीम लीडर का संदेश
ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा ख़ामेनेई ने सत्ता संभालने के बाद अपना पहला संदेश ईरानी टेलीविजन पर जारी किया। उनका यह बयान उनके स्वास्थ्य और शारीरिक स्थिति को लेकर चल रही अटकलों के बीच आया। इस संदेश में उन्होंने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज की नाकाबंदी जारी रखने और शहीद हुए लोगों का बदला लेने पर ज़ोर दिया।
पहला सार्वजनिक संदेश और युद्ध की दिशा
मोजतबा ख़ामेनेई ने अपने संदेश में अमेरिका और इसराइल के खिलाफ लगातार हमले जारी रखने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें इस्लामिक गणराज्य के टीवी चैनल के माध्यम से उनके चुनाव की जानकारी मिली थी। उनका यह बयान यह संकेत देता है कि नए नेतृत्व के तहत ईरान अंतरराष्ट्रीय मामलों में सख्त रुख अपनाएगा। साइप्रस में ईरान के राजदूत ने हाल ही में बताया था कि मोजतबा के पैर, हाथ और बाजू घायल हैं और संभवतः वे अस्पताल में भर्ती हैं। हालांकि, ईरानी सरकारी मीडिया ने उन्हें “युद्ध का अनुभवी” बताया, और कोई साफ़ जानकारी नहीं है कि वे गंभीर रूप से घायल हैं या हल्के।
मोजतबा ख़ामेनेई का जीवन और पृष्ठभूमि
मोजतबा का जन्म 8 सितंबर 1969 को ईरान के मशहद शहर में हुआ था। वे छह बच्चों में दूसरे नंबर पर हैं। उन्होंने तेहरान के धार्मिक अलावी स्कूल से माध्यमिक शिक्षा प्राप्त की। 17 साल की उम्र में मोजतबा ने ईरान-इराक़ युद्ध में सेना में सेवा दी। इस युद्ध ने ईरान और पश्चिमी देशों के बीच अविश्वास को और बढ़ाया। 1999 में उन्होंने धार्मिक अध्ययन जारी रखने के लिए क़ुम शहर में दाखिला लिया, जो शिया धर्मशास्त्र का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। मोजतबा ने कभी कम उम्र में धार्मिक वस्त्र नहीं पहने, और 30 साल की उम्र में उन्होंने धार्मिक पढ़ाई शुरू की।
उत्तराधिकारी और नेतृत्व की तैयारी
मोजतबा को उनके पिता, आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के उत्तराधिकारी के रूप में लंबे समय से देखा जाता रहा है। उनके पिता की 28 फरवरी को मृत्यु के बाद मोजतबा को ईरान का नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया।
हालांकि, मोजतबा ने सार्वजनिक रूप से कम ही उपस्थिति दर्ज की है और अक्सर पर्दे के पीछे प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे हैं। ईरानी मीडिया और अधिकारियों ने हाल ही में उन्हें ‘आयतुल्लाह’ के रूप में संबोधित करना शुरू किया है। इसका उद्देश्य उनके धार्मिक कद को बढ़ाना और उन्हें देश के सर्वोच्च नेतृत्व के लिए भरोसेमंद उम्मीदवार के रूप में पेश करना माना जा रहा है।
धार्मिक और राजनीतिक महत्व
मदरसों में ‘आयतुल्लाह’ की पदवी हासिल करना और बड़ी धार्मिक कक्षाओं को पढ़ाना व्यक्ति की विद्वता और नेतृत्व क्षमता का प्रमाण माना जाता है। यह पदवी भविष्य में ईरान के सर्वोच्च नेता बनने के लिए आवश्यक मापदंडों में शामिल होती है। 1989 में जब उनके पिता अली ख़ामेनेई ईरान के सर्वोच्च नेता बने थे, तब उन्हें भी जल्दी ही ‘आयतुल्लाह’ की उपाधि दी गई थी। मोजतबा के राजनीतिक सहयोगी और ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े वरिष्ठ नेता उन्हें एक सक्षम और अनुभवी नेता मानते हैं। मोजतबा ख़ामेनेई का पहला बयान न केवल उनके नेतृत्व की दिशा को दिखाता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय मामलों में सख्त रुख अपनाएगा। उनका राजनीतिक और धार्मिक अनुभव उन्हें देश के सर्वोच्च नेतृत्व के रूप में स्थापित करता है। उनका जीवन, शिक्षा और युद्ध में अनुभव, साथ ही पिता के नेतृत्व के तहत बढ़ती राजनीतिक समझ, मोजतबा को ईरान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व बनाते हैं। अब देखने वाली बात यह है कि उनके नेतृत्व में ईरान की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंध किस दिशा में आगे बढ़ेंगे।
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