तनाव और शारीरिक कारणों से रात में बार-बार नींद खुलना आम समस्या बन रही है
अगर आपकी नींद रोज़ सुबह 3 बजे खुल जाती है, तो यह सिर्फ थकान या असुविधा का मामला नहीं हो सकता। हेल्थ विशेषज्ञों के अनुसार, इसे मेंटेनेंस इंसोम्निया कहा जाता है। इसका मुख्य कारण मानसिक और भावनात्मक तनाव होता है, लेकिन कभी-कभी यह शारीरिक असुविधाओं या उम्र से जुड़े बदलावों के कारण भी हो सकता है।
तनाव का असर नींद पर
जब दिमाग लगातार सतर्क रहता है और तनाव में रहता है, तो शरीर गहरी नींद में नहीं जा पाता। काम का दबाव, परिवार की जिम्मेदारियां, पैसों की चिंता या स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां रात में बार-बार नींद खुलने का कारण बन सकती हैं। तनाव बढ़ने पर शरीर में कोर्टिसोल नामक हार्मोन बढ़ जाता है, जो दिमाग को सक्रिय रखता है। इसके अलावा, बुरे सपने, पुरानी चोट या नींद न आने की चिंता भी इस चक्र को और मजबूत कर देती है।
शारीरिक कारणों से नींद में बाधा
कई बार नींद खुलने का कारण सिर्फ मानसिक तनाव नहीं बल्कि शारीरिक असुविधा भी हो सकती है। कमर दर्द, गठिया, नसों का दर्द, एसिड रिफ्लक्स या बार-बार यूरिन आना रात में नींद को बाधित कर सकते हैं। उम्र बढ़ने के साथ ये समस्याएं और बढ़ सकती हैं। हल्की सी तकलीफ भी ब्रेन को संकेत देती है और नींद टूट जाती है। इस स्थिति में सही गद्दा, तकिए का चयन और डॉक्टर की सलाह से राहत पाई जा सकती है।
उम्र और हार्मोनल बदलाव
उम्र बढ़ने के साथ नींद का पैटर्न बदलना स्वाभाविक है। विशेष रूप से महिलाओं में रजोनिवृत्ति के दौरान हार्मोन में उतार-चढ़ाव नींद प्रभावित कर सकते हैं। हॉट फ्लैश, मूड स्विंग्स और हार्मोनल बदलाव नींद की गुणवत्ता को कम कर सकते हैं।
सोने का वातावरण और आदतें
नींद की गुणवत्ता में सोने का वातावरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कमरे में रोशनी, शोर, असुविधाजनक तापमान या साथी के खर्राटे नींद में बाधा डाल सकते हैं। मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल सोने से पहले मेलाटोनिन हार्मोन के स्राव को कम कर देता है। इसलिए बेहतर है कि सोने से कम से कम 30 मिनट पहले स्क्रीन से दूरी बनाकर रखें और कमरे को शांत, ठंडा और अंधेरा रखें।
नींद में सुधार के उपाय
नियमित सोने और जागने का समय तय करें। शाम को कैफीन और भारी भोजन से बचें। दिन में लंबी झपकी लेने से बचें। गहरी सांस लेने और ध्यान/मेडिटेशन का अभ्यास करें। कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी फॉर इंसोम्निया (CBT-I) को अपनाकर निगेटिव सोच और नींद की आदतों में सुधार लाया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर सीमित समय के लिए दवा भी सुझा सकते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान
नींद और मानसिक स्वास्थ्य गहरे रूप से जुड़े हैं। जब आप तनाव कम करते हैं और सकारात्मक दिनचर्या अपनाते हैं, तो नींद की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। इसलिए मानसिक और शारीरिक कारणों की पहचान करना महत्वपूर्ण है। रात में बार-बार नींद खुलना केवल एक असुविधा नहीं बल्कि स्वास्थ्य का संकेत हो सकता है। सही आदतें, मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान और शारीरिक स्वास्थ्य की देखभाल इसे कम करने में मदद करती हैं। यदि यह समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना आवश्यक है।
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी नई आदत या उपचार को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें। TARANG VOICE इसका पुष्टि नहीं करता
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