4 मार्च का इतिहास: भारत और विश्व की महत्वपूर्ण घटनाएं
इतिहास के पन्नों में हर तारीख का अपना अलग महत्व होता है। 4 मार्च भी ऐसे ही दिनों में से एक है, जिसने भारत और विश्व स्तर पर राजनीति, विज्ञान, साहित्य, स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक परिवर्तनों में कई यादगार घटनाओं को जन्म दिया। यह दिन संघर्ष, उपलब्धियों और प्रेरणा का प्रतीक रहा है। आइए, इस दिन की प्रमुख घटनाओं, जन्मों और निधनों पर नजर डालें।विश्व इतिहास में
4 मार्च की प्रमुख घटनाएँ
4 मार्च ने दुनिया के इतिहास में कई मील के पत्थर स्थापित किए हैं। 1519 में स्पेनिश खोजकर्ता हर्नान कोर्टेस मेक्सिको पहुंचे, जहां उन्होंने एज़टेक सभ्यता की खोज की और उसका अंत होने की शुरुआत हुई। 1681 में ब्रिटिश राजा चार्ल्स द्वितीय ने विलियम पेन को भूमि का चार्टर दिया, जिससे पेंसिल्वेनिया की स्थापना हुई।1789 में अमेरिकी संविधान प्रभावी हुआ और नई कांग्रेस की पहली बैठक न्यूयॉर्क में हुई, जिसने अमेरिकी लोकतंत्र की नींव मजबूत की। 1797 में जॉन एडम्स अमेरिका के दूसरे राष्ट्रपति बने। 1861 में अब्राहम लिंकन 16वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली, जब अमेरिका गृहयुद्ध के कगार पर था।1933 में फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट महामंदी के दौर में अमेरिका के 32वें राष्ट्रपति बने और अपनी प्रसिद्ध भाषण में कहा, “एकमात्र चीज जिससे हमें डरना चाहिए, वह डर खुद है।” यह दिन अमेरिकी राष्ट्रपति पदग्रहण का पारंपरिक तारीख रहा, जब तक 1933 में 20वां संशोधन नहीं हुआ।
अन्य घटनाओं में 1882 में ब्रिटेन में पहली इलेक्ट्रिक ट्राम शुरू हुई, 1890 में स्कॉटलैंड में फर्थ ब्रिज का उद्घाटन हुआ, और 1957 में एसएंडपी 500 शेयर सूचकांक लॉन्च हुआ। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी इस दिन कई महत्वपूर्ण सैन्य घटनाएं दर्ज हुईं।
भारत के इतिहास में 4 मार्च की प्रमुख घटनाएँ
भारत के संदर्भ में 4 मार्च कई उपलब्धियों से जुड़ा है। 1879 में कलकत्ता में बेथुन कॉलेज की स्थापना हुई, जो ब्रिटेन के बाहर महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा का पहला संस्थान था और महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम साबित हुआ।1951 में नई दिल्ली में पहले एशियाई खेलों का आयोजन 4 से 11 मार्च तक हुआ, जिसमें 11 देशों के 489 खिलाड़ी शामिल हुए। यह भारत की खेल परंपरा और अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान का महत्वपूर्ण पड़ाव था।1961 में भारतीय नौसेना को अपना पहला विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत मिला, जो 1971 के युद्ध में निर्णायक भूमिका निभाया और कई वीरता पुरस्कार जीते।स्वतंत्रता संग्राम में भी इस दिन की घटनाएं उल्लेखनीय हैं, जैसे 1921 में असहयोग आंदोलन के दौरान ननकाना साहिब गुरुद्वारे में हिंसा।
4 मार्च को जन्मे प्रमुख व्यक्ति
इस दिन कई महान हस्तियों ने जन्म लिया, जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दिया। 1856 में तोरु दत्त का जन्म हुआ, जो बंगाली-भारतीय कवयित्री और अनुवादक थीं और अंग्रेजी साहित्य में भारतीय आवाज लाईं।1881 में हिंदी कवि रामनरेश त्रिपाठी का जन्म हुआ, जिनकी रचनाएं राष्ट्रभक्ति और सामाजिक जागरण से भरी हैं। 1886 में स्वतंत्रता सेनानी बलुसु संबमूर्ति का जन्म हुआ, जो मद्रास विधान परिषद के अध्यक्ष भी रहे।
4 मार्च को हुए प्रमुख निधन
यह दिन कुछ महान व्यक्तियों के निधन का भी गवाह रहा। 1939 में क्रांतिकारी लाला हरदयाल का निधन हुआ, जो गदर पार्टी के संस्थापक थे और विदेशों में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूत किया।2007 में सांसद सुनील कुमार महतो और 2016 में पूर्व लोकसभा स्पीकर पी. ए. संगमा का निधन हुआ, जिनके योगदान राजनीति में अमिट हैं। 4 मार्च इतिहास की उन तारीखों में से है, जो हमें अतीत की सीख देती है। चाहे वह अमेरिकी संविधान का प्रभावी होना हो, महिलाओं की शिक्षा की शुरुआत हो, एशियाई खेलों का आयोजन हो या स्वतंत्रता संग्राम की घटनाएं यह दिन प्रगति, संघर्ष और परिवर्तन का प्रतीक है। हर घटना, हर जन्म और हर निधन हमें बेहतर भविष्य के लिए प्रेरित करता है। इतिहास से सीखकर हम वर्तमान को मजबूत बना सकते हैं।
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