भारत की पहली महिला राष्ट्रपति जो बनी सह-पायलट

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को भारतीय वायुसेना के स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर (एलसीएच) ‘प्रचंड’ में उड़ान भरकर एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने भारत-पाक सीमा के पास हेलीकॉप्टर में सह-पायलट की भूमिका निभाई, जिससे वे इस प्रकार की उड़ान भरने वाली पहली भारतीय राष्ट्रपति बन गईं। यह उड़ान राजस्थान के जैसलमेर में भारतीय वायुसेना के स्टेशन से शुरू हुई।

उड़ान का उद्देश्य और कार्यक्रम

राष्ट्रपति मुर्मू ने इस उड़ान के दौरान भारतीय वायुसेना के वायु शक्ति अभ्यास का अवलोकन भी किया। हेलीकॉप्टर ने लगभग 25 मिनट तक उड़ान भरी, और इस दौरान यह पोखरण फायरिंग रेंज के ऊपर से गुजरा, जहां शाम को वायु सेना द्वारा ‘वायु शक्ति’ प्रदर्शन आयोजित किया गया। उड़ान से पहले, वायुसेना के कैप्टन ने राष्ट्रपति को कॉकपिट की पूरी जानकारी दी। जैतून हरे रंग की वर्दी और हेलमेट पहने हुए, राष्ट्रपति ने प्रस्थान से पहले कॉकपिट से हाथ हिलाकर अभिवादन किया।

राष्ट्र के नाम संदेश

उड़ान के दौरान राष्ट्रपति ने राष्ट्र के नाम संदेश भी दिया। उन्होंने कहा:

“प्रचंड हेलीकॉप्टर आत्मनिर्भरता का एक सशक्त प्रतीक है। इस समय मैं जैसलमेर जिले के ऊपर उड़ान भर रही हूं। मैं हमारे वीर सैनिकों को हार्दिक शुभकामनाएं और गहरी कृतज्ञता व्यक्त करती हूं। आपको मेरा सादर सलाम। जय हिंद, जय भारत।” इस प्रकार राष्ट्रपति ने भारतीय सशस्त्र बलों के प्रति अपनी कृतज्ञता और सम्मान को व्यक्त किया।

राष्ट्रपति मुर्मू की पिछली उड़ानों का रिकॉर्ड

यह उड़ान राष्ट्रपति मुर्मू के लिए एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। पिछले वर्ष अक्टूबर में उन्होंने अंबाला वायुसेना स्टेशन पर राफेल लड़ाकू विमान में उड़ान भरी थी। इसके साथ ही वे भारतीय वायुसेना के दो अलग-अलग लड़ाकू विमानों में उड़ान भरने वाली पहली राष्ट्रपति बन गईं। अप्रैल 2023 में राष्ट्रपति ने तेजपुर, असम में सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान में लगभग 30 मिनट की उड़ान भरी थी। इस दौरान उन्होंने ब्रह्मपुत्र और तेजपुर घाटी के ऊपर से हिमालय का दृश्य भी देखा।

‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टर की विशेषताएँ

एलसीएच ‘प्रचंड’ भारत का पहला स्वदेशी हल्का लड़ाकू हेलीकॉप्टर है, जिसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने डिजाइन और विकसित किया है। इसका उद्देश्य भारतीय वायुसेना की युद्ध क्षमता को बढ़ाना है।

प्रचंड में निम्नलिखित विशेषताएँ हैं:

उन्नत एवियोनिक्स और स्टील्थ तकनीक
नाइट अटैक क्षमता
एयर-टू-ग्राउंड और एयर-टू-एयर मिसाइलें
रॉकेट और 20 मिमी गन
स्वदेशी तकनीक के माध्यम से आत्मनिर्भरता का प्रतीक
इन सभी विशेषताओं के कारण प्रचंड हेलीकॉप्टर भारतीय वायुसेना की अग्रिम मोर्चे की क्षमताओं को मजबूत करता है।

उच्च स्तरीय सैन्य सहभागिता

राष्ट्रपति द्वारा प्रचंड हेलीकॉप्टर में सह-पायलट के रूप में उड़ान भरना राष्ट्रपति की सैन्य प्लेटफॉर्म के साथ उच्च-स्तरीय सहभागिता की श्रृंखला का हिस्सा है। यह पहल भारतीय सशस्त्र बलों और नागरिक नेतृत्व के बीच भरोसे और सम्मान को दर्शाती है। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने जैसलमेर वायुसेना स्टेशन पर राष्ट्रपति का स्वागत किया। इससे यह साबित होता है कि भारतीय राष्ट्रपति अपने सर्वोच्च कमांडर के रूप में सशस्त्र बलों के कार्यों और प्रशिक्षण में सीधे भाग ले सकती हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की यह उड़ान केवल एक ऐतिहासिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह भारत के स्वदेशी रक्षा उपकरणों और सशस्त्र बलों की ताकत का प्रतीक भी है। प्रचंड हेलीकॉप्टर में सह-पायलट बनकर उड़ान भरना राष्ट्रपति के साहस, नेतृत्व और देशभक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण है।

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