CM रेखा गुप्ता के नेतृत्व में सरल प्रक्रियाएं, तेज स्वीकृति और रोजगार सृजन की दिशा में बड़े कदम
दिल्ली में व्यापार और उद्योग को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में सरकार लगातार प्रशासनिक सुधारों पर काम कर रही है। Ease of Doing Business को मजबूत करने के उद्देश्य से पुरानी और जटिल प्रक्रियाओं को हटाकर उन्हें अधिक पारदर्शी, डिजिटल और समयबद्ध बनाया जा रहा है। सरकार का मानना है कि जब व्यापार करना आसान होगा, तब निवेश बढ़ेगा, नए उद्योग स्थापित होंगे और रोजगार के अवसर स्वतः बढ़ेंगे। राजधानी में उद्योगों और व्यापारियों को लंबे समय से लाइसेंसिंग प्रक्रिया में देरी, विभिन्न विभागों की मंजूरी और पुलिस सत्यापन जैसी जटिलताओं का सामना करना पड़ता था। इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए CM रेखा गुप्ता की सरकार ने सात प्रमुख सेक्टरों में लाइसेंसिंग प्रक्रिया से पुलिस की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। इस निर्णय से व्यापार शुरू करने की प्रक्रिया तेज और सुगम हुई है। इससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि अनावश्यक कागजी कार्यवाही और विभागीय निर्भरता भी कम हुई है।
ग्रीन कैटेगरी उद्योगों को बड़ी राहत
पर्यावरण के अनुकूल और कम प्रदूषण वाले उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन कैटेगरी उद्योगों की स्वीकृति प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है। अब इन उद्योगों को मात्र 20 दिनों के भीतर मंजूरी दी जा रही है। पहले जहां महीनों तक स्वीकृति का इंतजार करना पड़ता था, अब तय समय सीमा के भीतर अनुमति मिल रही है। इससे नए उद्यमियों को तेजी से अपना व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिल रहा है। CM रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि स्वच्छ उद्योगों को प्रोत्साहन देना और पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक विकास को संतुलित रखना सरकार की प्राथमिकता है। तेज स्वीकृति प्रक्रिया से स्टार्टअप और छोटे उद्योगों को विशेष लाभ मिल रहा है, जिससे राजधानी में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ रही हैं।
कोलैटरल फ्री लोन से वित्तीय सहायता
छोटे और मध्यम व्यापारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती पूंजी की कमी होती है। इस समस्या को दूर करने के लिए ₹10 करोड़ तक के कोलैटरल फ्री लोन की व्यवस्था की गई है। बिना गारंटी के उपलब्ध इस वित्तीय सहायता से नए उद्यमियों और मौजूदा व्यापारियों को विस्तार का अवसर मिल रहा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का मानना है कि आर्थिक सशक्तिकरण के बिना रोजगार सृजन संभव नहीं है। यही कारण है कि युवा उद्यमियों को प्रोत्साहन देने और उन्हें जोखिम से मुक्त वातावरण प्रदान करने के लिए यह पहल की गई है। इससे नए व्यवसाय शुरू होंगे और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
‘दिल्ली व्यापारी कल्याण बोर्ड’ का गठन
व्यापारियों की समस्याओं और सुझावों को सीधे सरकार तक पहुंचाने के लिए ‘दिल्ली व्यापारी कल्याण बोर्ड’ का गठन किया गया है। इस बोर्ड का उद्देश्य व्यापारियों के हितों की रक्षा करना, उनकी शिकायतों का समाधान करना और नीतिगत सुधारों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना है। CM रेखा गुप्ता के नेतृत्व में यह कदम सरकार और व्यापारिक समुदाय के बीच संवाद को मजबूत करेगा। इससे नीति निर्माण में जमीनी हकीकत को शामिल किया जा सकेगा और निर्णय अधिक व्यावहारिक होंगे।
रोजगार और आर्थिक विकास पर प्रभाव
इन सुधारों का सीधा असर रोजगार सृजन और आर्थिक विकास पर पड़ रहा है। जब प्रक्रियाएं सरल होंगी और वित्तीय सहायता आसानी से उपलब्ध होगी, तो निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। नए उद्योग स्थापित होंगे और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। सरकार का लक्ष्य है कि दिल्ली को व्यापार के लिए देश के सबसे अनुकूल शहरों में शामिल किया जाए। पारदर्शी नीतियां, समयबद्ध स्वीकृति और वित्तीय सहयोग इस दिशा में मजबूत कदम हैं। CM रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार द्वारा उठाए गए ये कदम Ease of Doing Business को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास हैं। लाइसेंसिंग प्रक्रिया में सुधार, ग्रीन उद्योगों को तेज मंजूरी, कोलैटरल फ्री लोन और व्यापारी कल्याण बोर्ड का गठन ये सभी पहलें व्यापारियों को सशक्त बनाने और रोजगार बढ़ाने की दिशा में कारगर साबित हो सकती हैं। सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट है व्यापारियों के हित सर्वोपरि हैं। यदि इसी तरह नीतिगत सुधार जारी रहे, तो दिल्ली न केवल आर्थिक रूप से सशक्त होगी बल्कि रोजगार के नए अवसरों का प्रमुख केंद्र भी बनेगी।
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