25 जून 2025 को लखनऊ में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया, जब राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) और उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (PCDF) के बीच गोरखपुर, कानपुर, और कन्नौज के डेयरी प्लांट्स तथा अम्बेडकरनगर की पशु आहार निर्माणशाला के संचालन के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर हुए। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल हुए। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजनरी नेतृत्व के तहत अन्नदाता किसानों और पशुपालकों की आय को कई गुना बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। आइए, इस लेख में इस MoU के महत्व, इसके प्रभाव, और उत्तर प्रदेश में डेयरी क्षेत्र के भविष्य पर नजर डालते हैं।

MoU का क्या है उद्देश्य और महत्व

इस समझौते के तहत, उत्तर प्रदेश सरकार ने गोरखपुर, कानपुर, और कन्नौज में बंद पड़े डेयरी प्लांट्स और अम्बेडकरनगर में पशु आहार निर्माणशाला को 10 साल के लिए NDDB को लीज पर सौंपने का निर्णय लिया है। यह कदम PCDF द्वारा प्रस्तावित था, जिसे 24 अगस्त 2023 को जारी संशोधित दिशानिर्देशों के आधार पर मंजूरी दी गई। इस MoU का मुख्य उद्देश्य है:

बंद पड़े डेयरी प्लांट्स का पुनर्जनन: ये प्लांट्स पहले PCDF द्वारा संचालित थे, लेकिन आर्थिक और प्रबंधकीय समस्याओं के कारण बंद हो गए थे। NDDB की विशेषज्ञता से इन्हें फिर से शुरू किया जाएगा।

पशुपालकों की आय में वृद्धि: इन प्लांट्स के चालू होने से दूध उत्पादकों को स्थिर बाजार और बेहतर कीमतें मिलेंगी।

आधुनिक बुनियादी ढांचा: NDDB दूध प्रसंस्करण, गुणवत्ता जांच, और मूल्यवर्धित उत्पादों के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग करेगा।

पशु आहार की उपलब्धता: अम्बेडकरनगर की पशु आहार निर्माणशाला पशुपालकों को सस्ता और गुणवत्तापूर्ण चारा उपलब्ध कराएगी।

उत्तर प्रदेश में डेयरी क्षेत्र की स्थिति

उत्तर प्रदेश में डेयरी सहकारी समितियों का इतिहास गौरवशाली रहा है। 1917 में इलाहाबाद में ‘कात्रा कोऑपरेटिव मिल्क सोसाइटी’ की स्थापना के साथ देश में डेयरी सहकारी आंदोलन की शुरुआत हुई थी। 1938 में लखनऊ में ‘लखनऊ मिल्क प्रोड्यूसर्स कोऑपरेटिव यूनियन लिमिटेड’ की स्थापना देश का पहला मिल्क यूनियन था। 1962 में PCDF की स्थापना के बाद से यह संगठन मध्यस्थों को हटाकर किसानों और उपभोक्ताओं के बीच सीधा संबंध स्थापित करने में सफल रहा है।

वर्तमान में, उत्तर प्रदेश में 18 डेयरी क्लस्टर कार्यरत हैं, जिनमें बरेली, प्रयागराज, मुरादाबाद, झाँसी, आजमगढ़, अयोध्या, लखनऊ, मेरठ, कन्नौज, गोरखपुर, और कानपुर जैसे शहरों में PCDF द्वारा डेयरी प्लांट्स संचालित किए जा रहे हैं। NDDB पहले से ही वाराणसी में एक डेयरी प्लांट संचालित कर रहा है, और अब इस MoU के तहत कन्नौज, गोरखपुर, और कानपुर में नए प्लांट्स शुरू किए जाएंगे।

NDDB की भूमिका और योगदान

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB), जिसकी स्थापना 1965 में डॉ. वर्गीज कुरियन ने की थी, ने भारत को दूध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऑपरेशन फ्लड (1970-1998) के माध्यम से NDDB ने भारत को विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बनाया। इस MoU के तहत NDDB निम्नलिखित योगदान देगा:

तकनीकी विशेषज्ञता: NDDB आधुनिक दूध प्रसंस्करण और गुणवत्ता जांच के लिए नवीनतम तकनीकों का उपयोग करेगा।

महिलाओं का सशक्तिकरण: NDDB ने बूंदेलखंड के बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर जैसे मॉडल के माध्यम से महिलाओं को डेयरी क्षेत्र में सशक्त बनाया है, और इस MoU से यह प्रयास और बढ़ेगा।

वित्तीय सहायता: NDDB डेयरी प्रोसेसिंग एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (DIDF) के तहत 6.5% ब्याज दर पर सब्सिडी वाले ऋण प्रदान करता है।

पशुपालकों और किसानों के लिए लाभ

यह MoU उत्तर प्रदेश के पशुपालकों और किसानों के लिए कई लाभ लेकर आएगा:

बाजार पहुंच: बंद पड़े डेयरी प्लांट्स के फिर से शुरू होने से पशुपालकों को दूध बेचने के लिए स्थिर और लाभकारी बाजार मिलेगा।

बेहतर कीमतें: NDDB और PCDF के सहयोग से मध्यस्थों की भूमिका कम होगी, जिससे किसानों को उनके दूध की बेहतर कीमत मिलेगी।

पशु आहार की उपलब्धता: अम्बेडकरनगर की पशु आहार निर्माणशाला से सस्ता और गुणवत्तापूर्ण चारा उपलब्ध होगा, जिससे पशुओं की उत्पादकता बढ़ेगी।

रोजगार के अवसर: इन प्लांट्स के संचालन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, खासकर महिलाओं और युवाओं के लिए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर कहा, “यह MoU उत्तर प्रदेश के डेयरी क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। ये पशुपालकों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण साबित होगी ।”

चुनौतियाँ और भविष्य की संभावनाएँ

हालांकि यह MoU एक सकारात्मक कदम है, कुछ चुनौतियाँ अभी भी बाकी हैं:

प्रशिक्षण और जागरूकता: पशुपालकों को आधुनिक तकनीकों और गुणवत्ता मानकों के लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता है।

बुनियादी ढांचे का विकास: डेयरी प्लांट्स को पूरी तरह चालू करने के लिए सबसे ज्यादा बिजली, सड़क जैसी कई सुविधाओं का होना सबसे जरूरी है।

बाजार प्रतिस्पर्धा: निजी डेयरी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा एक चुनौती हो सकती है।

भविष्य में, यह MoU उत्तर प्रदेश को डेयरी क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बना सकता है। NDDB की तकनीकी विशेषज्ञता और PCDF का स्थानीय नेटवर्क इस क्षेत्र को आत्मनिर्भर और लाभकारी बनाने में मदद करेगा।

गोरखपुर, कानपुर, कन्नौज के डेयरी प्लांट्स और अम्बेडकरनगर की पशु आहार निर्माण Rúit निर्माणशाला के संचालन के लिए NDDB और PCDF के बीच हुआ MoU उत्तर प्रदेश के डेयरी क्षेत्र के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा। यह समझौता न केवल पशुपालकों की आय बढ़ाएगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करते हुए, यह पहल उत्तर प्रदेश को दूध उत्पादन और प्रसंस्करण में नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।

 लेखक: अभिषेक तिवारी

अभिषेक एक पत्रकार और राजनीतिक,धर्म, गांव से जुड़े होने की वजह से किसानी और पशुपालन में बेहतरीन जानकारी रखते है, जो उत्तर प्रदेश के ग्रामीण विकास और पशुपालन से जुड़े मुद्दों पर लेख लिखते हैं। वे किसानों और पशुपालकों के कल्याण के लिए समर्पित हैं।

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