Reserve Bank of India (RBI) ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) के लिए ब्रांच ऑथराइज़ेशन से जुड़े नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन गाइडलाइंस का मकसद NBFC कंपनियों के विस्तार को व्यवस्थित करना और वित्तीय सिस्टम में उनकी निगरानी को और मजबूत बनाना है।
नई गाइडलाइंस के अनुसार, डिपॉज़िट लेने वाली NBFCs, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां (HFCs) और इन्वेस्टमेंट एंड क्रेडिट कंपनियां (NBFC-ICCs) को अब ब्रांच खोलने के लिए कुछ खास नियमों का पालन करना होगा। RBI ने कंपनियों की वित्तीय स्थिति और क्रेडिट रेटिंग के आधार पर उनके विस्तार की सीमा तय की है।
जिन कंपनियों का नेट ओन्ड फंड 50 करोड़ रुपये तक है और जिनकी क्रेडिट रेटिंग कम है, उन्हें केवल अपने रजिस्टर्ड ऑफिस वाले राज्य में ही ब्रांच खोलने की अनुमति मिलेगी। वहीं, जिन NBFCs का नेट ओन्ड फंड 50 करोड़ रुपये से ज्यादा है और जिनकी क्रेडिट रेटिंग AA या उससे बेहतर है, वे पूरे देश में अपनी ब्रांच खोल सकती हैं।
ब्रांच खोलने की प्रक्रिया को भी आसान और पारदर्शी बनाया गया है। कंपनियों को अपने विस्तार की जानकारी RBI को देनी होगी। अगर 30 दिनों के भीतर RBI की ओर से कोई आपत्ति नहीं आती है, तो कंपनी अपने प्लान को आगे बढ़ा सकती है। यह पूरी प्रक्रिया PRAVAAH पोर्टल के जरिए पूरी की जाएगी।
हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के लिए भी अलग नियम तय किए गए हैं। इन्हें नई ब्रांच खोलने से पहले National Housing Bank (NHB) को सूचित करना जरूरी होगा। साथ ही, इन कंपनियों को विदेश में ब्रांच खोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इसके अलावा, जो NBFC-ICCs गोल्ड को गिरवी रखकर लोन देती हैं, उनके लिए भी खास दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। ऐसी कंपनियों को 1,000 से अधिक ब्रांच खोलने के लिए RBI से पहले अनुमति लेनी होगी। साथ ही, गिरवी रखे गए सोने की सुरक्षा के लिए सख्त इंतजाम करना अनिवार्य होगा।
नई गाइडलाइंस में ब्रांच बंद करने की प्रक्रिया भी स्पष्ट की गई है। यदि कोई NBFC अपनी ब्रांच बंद करना चाहती है, तो उसे कम से कम तीन महीने पहले सार्वजनिक नोटिस जारी करना होगा और RBI या NHB को इसकी जानकारी देनी होगी।
विदेश में प्रतिनिधि कार्यालय (Representative Office) खोलने के लिए भी RBI की मंजूरी जरूरी होगी। हालांकि, ऐसे ऑफिस केवल संपर्क और रिसर्च गतिविधियों तक ही सीमित रहेंगे और इनमें फंड ट्रांसफर की अनुमति नहीं होगी।
कुल मिलाकर, RBI के ये नए नियम NBFC सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ाने, जोखिम को कम करने और वित्तीय प्रणाली को और मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम माने जा रहे हैं।



