पहला चरण: बिहार में सुबह सात बजे से मतदान शुरू
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण का मतदान 6 नवंबर, गुरुवार सुबह सात बजे से शुरू हो गया है। मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जो राज्य के लोकतांत्रिक उत्सव का स्पष्ट संकेत है। इस बार चुनाव आयोग के विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) अभियान के बाद मतदाता सूचियों में भारी फेरबदल हुआ है, जिससे मतदान प्रतिशत में सुधार की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
राज्य में इस बार दो चरणों में मतदान होना है पहला चरण 6 नवंबर को और दूसरा चरण 11 नवंबर को। इन चुनावों को बिहार के राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।
पिछले चुनावों में कम मतदान की चुनौती
बिहार में पिछले एक दशक से मतदान प्रतिशत लगभग 57% के आसपास स्थिर रहा है। 2024 के लोकसभा चुनावों में राज्य का मतदान देश में सबसे कम 56.4% दर्ज किया गया था, जो राष्ट्रीय औसत से लगभग 10 प्रतिशत अंक कम था।
दिलचस्प बात यह है कि बिहार में आखिरी बार ऊंचा मतदान वर्ष 2000 के विधानसभा चुनावों में दर्ज हुआ था, जब यह 62.5% तक पहुंच गया था। इसके बाद से लगातार गिरावट देखी गई, हालांकि 2015 के विधानसभा चुनावों में कुछ सुधार हुआ और मतदान प्रतिशत 52.6% से बढ़कर 56.8% तक पहुंचा।
SIR अभियान से मतदाता सूचियों की ‘सफाई’
मतदान प्रतिशत में कमी का एक बड़ा कारण मतदाता सूची में दोहराव और मृत व्यक्तियों के नामों की उपस्थिति को माना गया था। इस समस्या से निपटने के लिए चुनाव आयोग ने विशेष गहन संशोधन (SIR) अभियान चलाया।
इस अभियान के बाद 68.66 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए, जिनमें से लगभग 22 लाख मृत मतदाता शामिल थे। वहीं, 21 लाख नए मतदाताओं को सूची में जोड़ा गया। नतीजतन, बिहार की अंतिम मतदाता सूची में अब 7.42 करोड़ मतदाता हैं, जो 2025 की शुरुआत में दर्ज 7.8 करोड़ से कम है।
चुनाव आयोग के एक अधिकारी के अनुसार, “SIR अभियान का मकसद मतदाता सूची को अधिक यथार्थवादी और विश्वसनीय बनाना था। अब जब सूची साफ है, तो वास्तविक मतदाताओं की भागीदारी बढ़ने की संभावना है।”
पटना और प्रवासी जिलों पर सभी की निगाहें
सबसे ज्यादा नाम हटाने वाले जिलों में राजधानी पटना शामिल है, जहां की 14 विधानसभा सीटों से 3.95 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि पिछली बार कम मतदान करने वाला पटना इस बार कैसा प्रदर्शन करता है।
इसके अलावा, मधुबनी (3.5 लाख नाम हटे), पूर्वी चंपारण (3.1 लाख), पश्चिमी चंपारण (1.91 लाख), सीतामढ़ी (2.4 लाख), सुपौल (1.2 लाख), अररिया (1.5 लाख) और पूर्णिया (2.7 लाख) जैसे जिलों में भी बड़े पैमाने पर संशोधन किए गए हैं। ये जिले प्रवासी मतदाताओं की बड़ी संख्या के लिए जाने जाते हैं, इसलिए यहां का मतदान प्रतिशत राज्यव्यापी आंकड़ों को प्रभावित कर सकता है।
क्या इस बार 60% के पार जाएगा मतदान प्रतिशत?
बिहार में मतदान प्रतिशत का 60% के पार जाना पिछले दो दशकों से एक चुनौती रहा है। SIR अभियान के बाद उम्मीद की जा रही है कि मतदाता सूची से फर्जी और निष्क्रिय नामों की सफाई के चलते वास्तविक मतदाताओं का अनुपात बढ़ेगा और मतदान दर में इजाफा होगा।
चुनाव आयोग ने मतदाताओं को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष जागरूकता अभियान भी चलाए हैं। युवा मतदाता, पहली बार वोट डालने वाले नागरिक, और महिला मतदाताओं की भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 सिर्फ राजनीतिक दलों की परीक्षा नहीं, बल्कि मतदाता सूची की शुद्धता और मतदाताओं की जागरूकता की भी परीक्षा है। SIR अभियान के बाद यदि राज्य में मतदान प्रतिशत 60% के पार पहुंचता है, तो यह चुनाव आयोग के सुधारात्मक प्रयासों की बड़ी सफलता मानी जाएगी।
पहले चरण के मतदान में जो उत्साह देखा जा रहा है, उससे उम्मीद की जा रही है कि बिहार के मतदाता इस बार लोकतंत्र के इस पर्व में पहले से अधिक संख्या में भाग लेंगे — और शायद इतिहास फिर से 62% मतदान के सुनहरे आंकड़े को छू ले।



