धर्म नहीं, मेरिट पर आधारित है एडमिशन
जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हाल ही में श्री माता वैष्णो देवी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) में एडमिशन विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह मेरिट-बेस्ड है और इसमें धर्म के आधार पर कोई आरक्षण नहीं है। उमर अब्दुल्ला ने जोर देकर कहा कि तय की गई प्रक्रिया ट्रांसपेरेंट और क्वांटिटेटिव मेरिट-बेस्ड है, जिसमें सभी उम्मीदवारों के साथ समान व्यवहार किया जाता है।
उन्होंने याद दिलाया कि श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी एक्ट में भी साफ तौर पर कहा गया है कि एडमिशन केवल मेरिट के आधार पर होंगे, धर्म के आधार पर नहीं। यह टिप्पणी बीजेपी नेता सुनील शर्मा की मांग के जवाब में आई, जिन्होंने एडमिशन केवल सनातन धर्म मानने वालों तक सीमित करने की बात कही थी।
धर्म आधारित आरक्षण संविधान के खिलाफ
उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया कि अगर बिना मेरिट के एडमिशन देना है, तो इसके लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति आवश्यक होगी। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार शिक्षा संस्थानों में धर्म के आधार पर सीटें बांटने लगे, तो फिर सोशल वेलफेयर स्कीम, राशन वितरण या पुलिस ड्यूटी जैसी सेवाओं में भी धर्म आधारित भेदभाव होना चाहिए क्या?
CM ने संविधान के सेक्युलर नेचर पर जोर देते हुए कहा कि धर्म के आधार पर एडमिशन देना संविधान के खिलाफ होगा। उन्होंने LoP सुनील शर्मा को सलाह दी कि वे J-K असेंबली द्वारा पास किए गए एक्ट का रिव्यू करें, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सीटें मेरिट पर आधारित हैं, न कि धर्म पर।
मेरिट बेस्ड सिस्टम का बचाव और छात्रों का उत्साह
उमर अब्दुल्ला ने उन छात्रों का भी बचाव किया जिन्होंने मेहनत और मेरिट के आधार पर सीटें हासिल कीं। उन्होंने कहा कि मेरिट-बेस्ड सिस्टम छात्रों को एंट्रेंस एग्जाम के लिए प्रेरित करता है और इसे धर्म आधारित प्रणाली से बदलने का विचार उचित नहीं है।
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अगर इस मेडिकल कॉलेज को धार्मिक कोटे के आधार पर एडमिशन देना शुरू किया गया, तो उसे गैर-हिंदुओं का इलाज करने से भी मना करना होगा, क्योंकि उसे उसी तरह फंड मिलता है। CM ने साफ कहा कि शिक्षा, सामाजिक कल्याण और सार्वजनिक सेवाओं में धर्म आधारित भेदभाव कभी स्वीकार्य नहीं है।
अब्दुल्ला ने दोहराया कि अगर मेरिट-बेस्ड सिस्टम में बदलाव करना है, तो सुप्रीम कोर्ट की अनुमति और कानून में संशोधन की आवश्यकता होगी। वर्तमान कानून धर्म आधारित आरक्षण की अनुमति नहीं देता। उन्होंने संविधान के सेक्युलर नेचर का हवाला देते हुए कहा कि शिक्षा संस्थानों में धर्म आधारित कोटा लागू करने का कोई कदम कानूनी नहीं होगा।
इस प्रकार मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट कर दिया कि SMVDIME में एडमिशन केवल मेरिट पर आधारित हैं, और धर्म के आधार पर किसी भी तरह का भेदभाव संविधान और कानून के खिलाफ है।




