ट्रंप के बयान से शेयर बाजार में दबाव, सेंसेक्स 376 अंक टूटा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया चेतावनी का असर मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ नजर आया। घरेलू बाजार में लगातार दूसरे दिन बिकवाली का माहौल रहा, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 500 अंकों से ज्यादा फिसल गया, जबकि निफ्टी में भी करीब 100 अंकों तक की कमजोरी देखी गई।
दूसरे दिन भी लाल निशान में बंद हुआ बाजार
नई दिल्ली: मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार कमजोरी के साथ बंद हुआ। बीएसई सेंसेक्स 376.28 अंक यानी 0.42 फीसदी गिरकर 85,063.34 के स्तर पर आ गया। वहीं एनएसई निफ्टी 71.60 अंक यानी 0.27 फीसदी टूटकर 26,178.70 पर बंद हुआ। इससे पहले सोमवार को भी बाजार में गिरावट दर्ज की गई थी, जब सेंसेक्स 332 अंक नीचे आया था।
रिलायंस और ट्रेंट ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता
कारोबार के दौरान देश की सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में लगभग 5 फीसदी तक की गिरावट देखी गई। इस गिरावट से कंपनी के मार्केट कैप में करीब 1 लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई। यह जून 2024 के बाद रिलायंस शेयरों की सबसे बड़ी इंट्राडे गिरावट मानी जा रही है।
इसके अलावा टाटा समूह की रिटेल कंपनी ट्रेंट के शेयरों में 8 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई, जिससे निवेशकों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा।
निफ्टी में कौन रहे नुकसान में और कौन चमके
निफ्टी इंडेक्स में ट्रेंट, रिलायंस और टाटा मोटर्स के पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव रहा। एचडीएफसी बैंक और इन्फोसिस के शेयर भी कमजोर कारोबार करते नजर आए।
हालांकि, अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइजेज, बजाज ऑटो और आईसीआईसीआई बैंक जैसे शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार की गिरावट कुछ हद तक सीमित रही।
सेक्टर के हिसाब से कैसा रहा बाजार का हाल
सेक्टरवाइज प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी केमिकल्स इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। इन सेक्टर्स पर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक अनिश्चितता का असर दिखाई दिया।
वहीं दूसरी ओर निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी फार्मा सेक्टर में मजबूती देखने को मिली। बैंकिंग और फार्मा शेयरों में आई तेजी ने बाजार को ज्यादा टूटने से संभाले रखा।
गिरावट के पीछे क्या है मुख्य कारण?
बाजार में आई कमजोरी की बड़ी वजह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान माना जा रहा है। ट्रंप ने कहा है कि अगर भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद कम नहीं करता, तो भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है।
फिलहाल अमेरिका में भारतीय सामानों पर कुल 50 फीसदी टैरिफ लागू है, जिसमें से 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क रूस से तेल खरीद को लेकर जोड़ा गया है। इस बयान के बाद वैश्विक निवेशकों में असमंजस की स्थिति बन गई, जिसका असर भारतीय बाजार पर पड़ा।
निवेशकों का सेंटीमेंट क्यों हुआ कमजोर
लगातार दो कारोबारी सत्रों में आई गिरावट से निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिल रहे नकारात्मक संकेतों और भू-राजनीतिक तनाव ने बाजार की दिशा पर दबाव बनाया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अनिश्चितता बने रहने पर उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
आगे किन बातों पर रखें नजर
विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिका-भारत व्यापार संबंधों पर खास नजर रखनी चाहिए। मौजूदा हालात में सतर्क रणनीति अपनाने और चुनिंदा शेयरों में ही निवेश करने की सलाह दी जा रही है।
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