ग्रामीण रोजगार और आजीविका में रिकॉर्ड उपलब्धि, लाखों महिलाओं को मिला रोजगार

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में अब सरकारी योजनाओं का असर सिर्फ कागज़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जमीन पर साफ दिख रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने ग्रामीण रोजगार और आजीविका के क्षेत्र में तेजी से काम किया है। वित्तीय वर्ष 2025–26 में प्रदेश के 23 लाख से अधिक महिलाओं को रोजगार के अवसर मिले। इस उपलब्धि ने लाखों ग्रामीण परिवारों को आर्थिक मजबूती दी और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम साबित हुई। मानव दिवस सृजन में महिलाओं की भागीदारी 43 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिससे यह साफ हुआ कि ग्रामीण कार्यशक्ति में महिलाएं बराबरी की भूमिका निभा रही हैं।

महिलाएं बनीं सिर्फ कामगार नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता

योगी सरकार की नीतियों का सबसे बड़ा असर यह दिखा कि महिलाओं को केवल रोजगार तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें जिम्मेदार पदों पर आगे लाया गया। मौजूदा वित्तीय वर्ष में 32 हजार से अधिक महिला मेट्स को विभिन्न कार्यों की जिम्मेदारी दी गई है। ये महिलाएं काम की निगरानी, श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज करना, कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और प्रबंधन जैसे अहम दायित्व निभा रही हैं। सरकार ने इन महिला मेट्स को 111 करोड़ रुपये से अधिक सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर किए हैं, जिससे पारदर्शिता बढ़ी और सिस्टम पर भरोसा मजबूत हुआ।

स्वयं सहायता समूह और समय पर भुगतान ने बढ़ाया विश्वास

ग्रामीण क्षेत्रों में महिला नेतृत्व को मजबूती देने में स्वयं सहायता समूहों (SHG) की भूमिका भी अहम रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं को प्राथमिकता देकर काम और फैसलों में भागीदारी दी जा रही है। इससे महिलाओं की प्रबंधन क्षमता विकसित हो रही है और वे गांव की अर्थव्यवस्था और विकास योजनाओं में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। रोजगार योजनाओं में सबसे बड़ी चुनौती भुगतान प्रणाली होती है, लेकिन यूपी में इस क्षेत्र में सुधार के संकेत मिले हैं। आंकड़ों के अनुसार 97 प्रतिशत से अधिक श्रमिकों को समय पर भुगतान किया गया, जिससे ग्रामीण रोजगार की विश्वसनीयता और मजबूत हुई।

गांवों में आय के नए रास्ते और समावेशी विकास

प्रदेश में ग्रामीण रोजगार योजनाओं के तहत अब तक 6703 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की जा चुकी है। इस निवेश से विकास कार्यों में तेजी आई, स्थानीय रोजगार बढ़ा और पलायन पर रोक लगी। अनुसूचित जाति और जनजाति के परिवारों को प्राथमिकता देकर सरकार ने समावेशी विकास का मॉडल भी मजबूत किया।

सशक्त महिलाएं, मजबूत गांव

योगी सरकार की यह पहल अब सिर्फ योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक बदलाव की मिसाल बन रही है। रोजगार, नेतृत्व और वित्तीय आत्मनिर्भरता को एक साथ जोड़कर उत्तर प्रदेश के गांव महिला-आधारित विकास मॉडल की दिशा में बढ़ रहे हैं। आज के सशक्त महिलाएं ही प्रदेश की नई पहचान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत बन रही हैं। यह मॉडल अन्य राज्यों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।

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