लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जूनियर इंजीनियर (JE) भर्ती को लेकर लंबे समय से चल रही असमंजस की स्थिति पर अब विराम लग गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस मामले में अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि इस भर्ती प्रक्रिया में केवल डिप्लोमा धारक अभ्यर्थी ही शामिल हो सकेंगे। डिग्री होल्डर्स को इसमें भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

हाईकोर्ट की डबल बेंच ने यह फैसला डिग्री धारक उम्मीदवारों द्वारा दाखिल याचिका को खारिज करते हुए सुनाया। याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि उन्हें भी जूनियर इंजीनियर भर्ती परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जाए, लेकिन कोर्ट ने भर्ती नियमों और पात्रता शर्तों का हवाला देते हुए उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

दरअसल, उत्तर प्रदेश में 4612 पदों पर जूनियर इंजीनियर भर्ती की प्रक्रिया जारी है। इस भर्ती के लिए पहले से ही स्पष्ट किया गया था कि केवल डिप्लोमा धारक उम्मीदवार ही आवेदन के पात्र होंगे। इसके बावजूद डिग्री होल्डर्स ने इसे चुनौती दी थी, जिससे भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए थे।

कोर्ट के इस फैसले के बाद अब भर्ती प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। आगामी 3 मई को प्रस्तावित लिखित परीक्षा भी अपने निर्धारित समय पर आयोजित की जाएगी। इससे उन लाखों अभ्यर्थियों को राहत मिली है, जो लंबे समय से परीक्षा की तारीख और पात्रता को लेकर असमंजस में थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय तकनीकी पदों की भर्ती में स्पष्टता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि भर्ती नियमों में यदि स्पष्ट रूप से डिप्लोमा योग्यता निर्धारित की गई है, तो उसमें बदलाव करने का अधिकार कोर्ट के पास नहीं है, जब तक कि नियमों में कोई संवैधानिक खामी न हो।

इस फैसले के बाद डिग्री धारक उम्मीदवारों के लिए यह एक झटका माना जा रहा है, वहीं डिप्लोमा धारकों में खुशी का माहौल है। अब सभी की नजरें 3 मई को होने वाली लिखित परीक्षा पर टिकी हैं, जो इस भर्ती प्रक्रिया का अगला महत्वपूर्ण चरण होगी।

सरकारी विभागों में तकनीकी पदों पर भर्ती को लेकर यह फैसला भविष्य में भी एक मिसाल के तौर पर देखा जा सकता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि निर्धारित योग्यता और नियमों का पालन सर्वोपरि है।

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