भारतीय शेयर बाजार में लगातार दबाव

भारतीय शेयर बाजार में 21 जनवरी को लगातार तीसरे दिन गिरावट का दौर जारी रहा। बीएसई सेंसेक्स कारोबार के दौरान करीब 950-1000 अंकों तक टूट गया, जबकि निफ्टी 25,000 के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर नीचे चला गया। यह गिरावट निवेशकों के बीच चिंता पैदा कर रही है, क्योंकि बाजार में सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में रहे। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी 1.5% से अधिक टूट गए।

1. रुपये की कमजोरी

शेयर बाजार पर दबाव डालने वाले सबसे बड़े कारणों में से एक भारतीय रुपये का लगातार कमजोर होना रहा। शुरुआती कारोबार में रुपया 91.28 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया, जो अब तक का रिकॉर्ड लो है। विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की बढ़ती मांग, भू-राजनीतिक तनाव और शेयर बाजार से विदेशी निवेश की निकासी ने भारतीय करेंसी पर दबाव बढ़ाया।

2. विदेशी निवेशकों की बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने बाजार को कमजोर किया। जनवरी के पहले 21 दिनों में विदेशी निवेशकों ने लगभग 32,253 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की। केवल 2 जनवरी को ही उन्होंने थोड़ी खरीदारी की थी। लगातार बिकवाली के कारण बाजार में दहशत और अस्थिरता का माहौल बना।

3. तिमाही नतीजों से मिले मिश्रित संकेत

कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार को कोई मजबूत दिशा देने में असफल रहे। आईटी और निजी बैंक सेक्टर के नतीजे अपेक्षाओं से कमजोर रहे। शॉपर्स स्टॉप जैसी कंपनियों के शेयर भी कमजोर प्रदर्शन के कारण 10% तक गिर गए। विशेषज्ञों के अनुसार, ऑटो सेक्टर से मिले परिणामों के बाद ही स्थिति में कुछ सुधार की उम्मीद है।

4. वैश्विक संकेत कमजोर

एशियाई और अमेरिकी बाजारों में भी गिरावट ने भारतीय शेयर बाजार पर दबाव डाला। नैस्डैक, एसएंडपी 500 और डॉव जोंस समेत कई प्रमुख अमेरिकी इंडेक्स मंगलवार को बड़े पैमाने पर टूटे। यूरोपीय देशों के संभावित टैरिफ और अमेरिका की आक्रामक नीति ने वैश्विक निवेशकों के लिए अस्थिरता बढ़ाई।

5. इंडिया VIX में तेजी

इंडिया VIX, जो बाजार में अस्थिरता का संकेत देता है, में बुधवार को करीब 4% की बढ़ोतरी हुई और यह 13.22 के स्तर पर पहुंच गया। VIX में बढ़ोतरी निवेशकों की चिंता और जोखिम लेने से बचने के संकेत देती है। इसका अर्थ है कि बाजार में आगे उतार-चढ़ाव की संभावना अधिक है।

6. भू-राजनीतिक तनाव

भू-राजनीतिक कारणों ने भी बाजार में नकारात्मक प्रभाव डाला। अमेरिकी राष्ट्रपति के ग्रीनलैंड से जुड़े बयानों और यूरोपीय देशों के खिलाफ संभावित टैरिफ के कदम वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ा रहे हैं। निवेशक सुरक्षित एसेट्स की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे इक्विटी बाजार पर दबाव बना हुआ है।

तकनीकी विश्लेषण और आगे का रुझान

विशेषज्ञों का मानना है कि निफ्टी में फिलहाल गिरावट का रुझान जारी रह सकता है। हालांकि बीच-बीच में हल्की रिकवरी या पुलबैक संभव है। लेकिन जब तक मुख्य रेजिस्टेंस स्तरों को मजबूती से पार नहीं किया जाता, तब तक लंबी तेजी टिकने की संभावना कम है। निवेशकों को सावधानी के साथ बाजार का रुख देखने की सलाह दी जा रही है। भारतीय शेयर बाजार में इस गिरावट के पीछे कई कारण हैं रुपये की कमजोरी, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, मिश्रित तिमाही नतीजे, वैश्विक संकेतों में कमजोरी, बढ़ता इंडिया VIX और भू-राजनीतिक तनाव। निवेशकों को इस समय सावधानी बरतने, अपने पोर्टफोलियो का रिव्यू करने और जरूरत पड़ने पर सर्टिफाइड वित्तीय सलाहकार से मार्गदर्शन लेने की जरूरत है।

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