बिहार राजनीति का निर्णायक दिन

2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में मतगणना का महत्वपूर्ण चरण चल रहा है। चुनाव दो चरणों में 6 और 11 नवंबर को आयोजित किए गए थे, जिसमें ऐतिहासिक मतदान 67.13% रहा। कुल 7.45 करोड़ से अधिक मतदाता 243 विधानसभा सीटों पर 2,616 उम्मीदवारों की किस्मत तय कर रहे हैं। आज बिहार की राजनीतिक दिशा तय होने वाली है और राज्य अपने अगले सरकार के गठन के लिए बेताब है।

प्रारंभिक रुझान: एनडीए बढ़त में

46 केंद्रों पर सुबह 8:00 बजे से मतगणना शुरू हुई और शुरुआती रुझान एनडीए के पक्ष में हैं। शुरुआती अपडेट के अनुसार एनडीए 156 सीटों पर आगे है, जबकि महागठबंधन 73 सीटों पर पीछे चल रहा है। प्रोत्साहक पार्टी, जनता का सूरज (जनसुराज पार्टी), 3 सीटों पर आगे है। ये रुझान एनडीए के सरकार बनाने की संभावना को मजबूत कर रहे हैं और अधिकांश एग्जिट पोल के अनुमान के अनुरूप हैं।

अलीनगर पर नजर: मैथिली ठाकुर की शुरुआती बढ़त

दारभंगा की अलीनगर विधानसभा सीट इस चुनाव की सबसे चर्चित सीट बन गई है। भाजपा उम्मीदवार और लोकप्रिय लोक गायिका मैथिली ठाकुर यहां अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत कर रही हैं। वे आरजेडी के अनुभवी नेता बिनोद मिश्रा के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं। शुरुआती रुझान में मैथिली ठाकुर आगे चल रही हैं, और यदि यह बढ़त कायम रहती है तो यह उनकी पहली बड़ी जीत होगी। अलीनगर में ब्राह्मण, यादव और अन्य पिछड़ा वर्गों की मजबूत आबादी के कारण यह मुकाबला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आरजेडी की चिंताएँ और विवाद

मतगणना के बीच, आरजेडी नेताओं ने निष्पक्षता पर सवाल उठाए। वरिष्ठ आरजेडी नेता सुनील सिंह ने कथित मतगणना में गड़बड़ी की स्थिति में विरोध की चेतावनी दी, जिससे राजनीतिक विवाद उत्पन्न हुआ। भाजपा नेताओं ने इसे “आरजेडी की कानूनहीन संस्कृति” के रूप में बताया। सुनील सिंह के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है। इस बीच आरजेडी प्रमुख तेजस्वी यादव ने मतगणना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की अपील की और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करने पर जोर दिया।

मुख्य विधानसभा सीटें और पार्टियों का प्रदर्शन

एनडीए: भाजपा और जेडीयू की गठबंधन बढ़त में है। जेडीयू 75 सीटों के आस-पास जा रही है, जबकि भाजपा लगभग 74 सीटें हासिल कर रही है। अन्य एनडीए सहयोगी जैसे कि एलजेपी (आर), उपेंद्र कुशवाहा और जितन राम मांझी भी अच्छे प्रदर्शन में हैं।

महागठबंधन: पिछड़ रहा है। आरजेडी, जो 2020 में 75 सीटें जीतने में सफल थी, इस बार लगभग 45 सीटों पर सीमित दिख रही है। कांग्रेस और वाम दल भी पिछड़ रहे हैं। वीआईपी के मुकेश साहनी का प्रभाव भी कम होता दिख रहा है।

जनसुराज पार्टी: प्रशांत किशोर की पार्टी ने 5,000 से अधिक गांवों में प्रचार किया, लेकिन चुनावी प्रभाव कम दिखाई दे रहा है और केवल 3 सीटों पर बढ़त में है।

राजनीतिक नेताओं के बयान

तेजस्वी यादव: निष्पक्ष मतगणना की अपील की और मतदाता के निर्णय का सम्मान करने पर जोर दिया।

भाजपा नेता: आरजेडी के धमकी भरे बयान को खतरनाक बताया और सभी से शांतिपूर्ण रूप से चुनाव परिणाम स्वीकार करने की अपील की।

सिपाई नेता (सीपीआई-एमएल): पारदर्शिता बनाए रखने और मतगणना प्रक्रिया का सम्मान करने की अपील की।

जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ रही है, सबकी निगाहें बिहार पर हैं। एनडीए सरकार बनाने की दिशा में मजबूत दिख रही है, जिसमें जेडीयू और भाजपा प्रमुख लाभार्थी हैं। महागठबंधन को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अलीनगर में मैथिली ठाकुर की बढ़त पूरे देश का ध्यान खींच रही है, जबकि प्रशांत किशोर की पार्टी अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर रही।

बिहार का यह राजनीतिक नाटक यह दिखाता है कि लोकतंत्र में मतदाता, राजनीतिक रणनीतियाँ और स्थानीय परिस्थिति कैसे मिलकर भविष्य तय करती हैं। आज शाम तक राज्य में नई सरकार का गठन निश्चित हो जाएगा, और यह बिहार की राजनीतिक इतिहास का निर्णायक क्षण साबित होगा।

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