पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की 125वीं जयंती पर प्रधानमंत्री मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दी श्रद्धांजलि

आज भारतीय इतिहास के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक, पंडित जवाहरलाल नेहरू की 125वीं जयंती मनाई जा रही है। भारतीय राजनीति के शिखर पर उनका योगदान अद्वितीय रहा है और उनकी योजनाओं तथा नीतियों ने न सिर्फ देश की राजनीति बल्कि समाज को भी गहरे प्रभाव डाले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई अन्य नेताओं ने इस मौके पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।

नेहरू की जयंती: एक ऐतिहासिक अवसर

पंडित जवाहरलाल नेहरू 14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद में जन्मे थे और उन्होंने भारत को स्वतंत्रता के बाद एक नई दिशा दी थी। वह भारतीय गणराज्य के पहले प्रधानमंत्री बने और 17 वर्षों तक देश की बागडोर संभाली। उनकी जयंती ‘बाल दिवस’ के रूप में मनाई जाती है, क्योंकि वह बच्चों के लिए समर्पित थे और उन्हें हमेशा प्रेरित किया कि वे राष्ट्र निर्माण में योगदान करें। आज, 125 साल बाद भी उनकी नीतियाँ और उनके दृष्टिकोण भारत के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।

पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पंडित नेहरू की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि नेहरू जी ने भारतीय राजनीति और समाज को एक नई दिशा दी। पीएम मोदी ने ट्वीट कर लिखा, “पंडित नेहरू के योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। उनके दृष्टिकोण ने न केवल भारत को एकजुट किया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी देश की पहचान को मजबूती दी। आज उनकी 125वीं जयंती पर मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।”

प्रधानमंत्री मोदी ने नेहरू जी के द्वारा किए गए महान कार्यों की सराहना की, जिसमें भारतीय विज्ञान, शिक्षा, औद्योगिकीकरण और औपनिवेशिक साम्राज्य के अंत के बाद नवभारत का निर्माण शामिल था। उन्होंने नेहरू जी के योगदान को और अधिक सम्मानित किया और कहा कि उनकी नीतियों ने भारतीय समाज को आधुनिकता की दिशा में एक मजबूत कदम बढ़ाया।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की श्रद्धांजलि

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी पंडित नेहरू की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि नेहरू जी के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। खरगे ने नेहरू जी के बारे में कहा, “नेहरू जी का योगदान भारतीय राजनीति, समाज और संस्कृति में बहुत महत्वपूर्ण है। उनका नेतृत्व और दृष्टिकोण हमेशा हम सभी के लिए मार्गदर्शक रहेगा। उन्होंने भारत को एक नई पहचान दी और देश को समृद्ध और शक्तिशाली बनाने के लिए कार्य किए।”

खरगे ने नेहरू जी की जयंती के अवसर पर उनके विचारों और उनके द्वारा स्थापित संस्थाओं का सम्मान किया। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी नीतियों ने भारतीय लोकतंत्र को मजबूत किया और भारतीय समाज को एकजुट किया।

नेहरू का योगदान और स्थायी धरोहर

पंडित नेहरू ने स्वतंत्र भारत की नींव रखी और देश को एक राष्ट्र के रूप में एकजुट करने के लिए कई अहम कदम उठाए। उनकी प्रमुख नीतियाँ, जैसे औद्योगिकीकरण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में निवेश, और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार, आज भी भारतीय समाज में प्रासंगिक हैं।

उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक नेहरू विज्ञान केंद्र और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की स्थापना थी, जिन्होंने भारत को एक वैश्विक विज्ञान और प्रौद्योगिकी महाशक्ति के रूप में स्थापित किया। उनका दृष्टिकोण था कि एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत केवल विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रसर होने से ही संभव है।

नेहरू जी ने हमेशा भारतीय बच्चों और युवाओं को यह प्रेरित किया कि वे शिक्षा, रचनात्मकता और ज्ञान के माध्यम से अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करें। उनका मानना था कि केवल शिक्षा से ही एक बेहतर और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है। यही कारण था कि उन्होंने नेहरू विज्ञान केंद्र, नेहरू म्यूजियम और कई शैक्षिक संस्थाओं की स्थापना की।

नेहरू के विचारों का आज भी महत्व

आज भी पंडित नेहरू के विचारों और उनके द्वारा स्थापित नीतियों का भारतीय राजनीति और समाज पर गहरा प्रभाव पड़ा है। उनकी नॉन-अलाइनमेंट नीति और गांधीवादी सिद्धांतों के आधार पर उन्होंने भारत की विदेश नीति को आकार दिया। उनका यह मानना था कि भारत को अपने वैश्विक हितों की रक्षा करने के लिए स्वतंत्र रहना चाहिए और किसी भी महाशक्ति के दबाव में नहीं आना चाहिए।

उनकी स्थायी धरोहर केवल उनके द्वारा स्थापित संस्थाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी न्याय, समानता और शिक्षा की नीति आज भी हमारे समाज में प्रभावी है।

आज पंडित नेहरू की 125वीं जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित अन्य नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। पंडित नेहरू के विचारों और नीतियों का प्रभाव आज भी भारतीय समाज और राजनीति में गहरा है। उनकी स्थायी धरोहर, जो भारत के विज्ञान, शिक्षा, और राजनीतिक विचारों को आकार देती है, हमें हमेशा प्रेरित करती रहेगी।

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