75 वर्षों की मित्रता, व्यापार, भू-राजनीति और जनसंपर्क के नए आयाम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जॉर्डन दौरा केवल एक औपचारिक राजनयिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह भारत-जॉर्डन संबंधों की 75 वर्षों की ऐतिहासिक साझेदारी को नई दिशा देने का अवसर है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब मध्य पूर्व भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति शृंखलाओं के पुनर्संयोजन और ऊर्जा व खाद्य सुरक्षा जैसी चुनौतियों से गुजर रहा है। ऐसे में जॉर्डन जैसे स्थिर और भरोसेमंद देश के साथ भारत का सहयोग विशेष महत्व रखता है।
ऐतिहासिक रिश्तों की मजबूत नींव
भारत और जॉर्डन के बीच संबंध स्वतंत्रता के शुरुआती वर्षों से ही मजबूत रहे हैं। वर्ष 1947 में दोनों देशों के बीच पहला द्विपक्षीय समझौता हुआ और 1950 में पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित किए गए। जॉर्डन उन शुरुआती देशों में शामिल है, जिनसे स्वतंत्र भारत ने कूटनीतिक रिश्ते बनाए। यही ऐतिहासिक निरंतरता इस दौरे को प्रतीकात्मक के साथ-साथ व्यावहारिक रूप से भी महत्वपूर्ण बनाती है।
भू-राजनीतिक दृष्टि से जॉर्डन का महत्व
भू-राजनीतिक रूप से जॉर्डन मध्य पूर्व का एक अहम देश है। इसकी सीमाएं सऊदी अरब, सीरिया, इराक और फ़लस्तीनी क्षेत्रों से जुड़ी हैं, जबकि अकाबा की खाड़ी के माध्यम से इसकी समुद्री पहुँच है। सीमित प्राकृतिक संसाधनों के बावजूद जॉर्डन ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अमेरिका का करीबी सहयोगी होने के साथ-साथ जॉर्डन संतुलित विदेश नीति अपनाता है, जिससे भारत के लिए यह एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार बनता है।
व्यापार और आर्थिक सहयोग की बढ़ती भूमिका
आर्थिक मोर्चे पर भारत और जॉर्डन के संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। भारत आज जॉर्डन का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2023-24 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 2.9 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। भारत जॉर्डन को चावल, मांस, चाय और कॉफी जैसे खाद्य उत्पाद निर्यात करता है, जबकि जॉर्डन से भारत फॉस्फोरिक एसिड और कैल्शियम फॉस्फेट जैसे कच्चे माल का आयात करता है, जो भारत के उर्वरक और रसायन उद्योग के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
उर्वरक और संसाधन सुरक्षा में साझेदारी
उर्वरक क्षेत्र में भारत-जॉर्डन सहयोग इस द्विपक्षीय रिश्ते की रीढ़ माना जाता है। जॉर्डन फॉस्फेट माइनिंग कंपनी और भारतीय कंपनियों, विशेष रूप से इफको, के बीच बड़े पैमाने पर संयुक्त परियोजनाएं चल रही हैं। यह सहयोग भारत की खाद्य सुरक्षा से सीधे जुड़ा है और आने वाले वर्षों में इसके और विस्तार की संभावनाएं हैं।
भारतीय कामगार और जनसंपर्क संबंध
जॉर्डन में लगभग 17,500 भारतीय नागरिक रहते हैं और कुल मिलाकर 25 से 30 हजार भारतीय कामगार निर्माण, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में कार्यरत हैं। ये कामगार हर वर्ष बड़ी मात्रा में धनराशि भारत भेजते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि भारत-जॉर्डन संबंध केवल व्यापारिक आंकड़ों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोगों से लोगों के रिश्तों पर आधारित हैं।
सांस्कृतिक, पर्यटन और सामाजिक जुड़ाव
सांस्कृतिक स्तर पर भी दोनों देशों के बीच गहरा जुड़ाव है। जॉर्डन में बॉलीवुड फिल्मों और भारतीय कलाकारों की लोकप्रियता बढ़ रही है और कई भारतीय फिल्मों की शूटिंग वहां हो चुकी है। योग दिवस, सांस्कृतिक उत्सवों में भारतीय भागीदारी, वीज़ा सुविधाओं में सुधार और पर्यावरणीय पहलें—जैसे वृक्षारोपण अभियान—दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाती हैं।
भविष्य की साझेदारी की ओर कदम
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जॉर्डन दौरा ऐतिहासिक मित्रता, रणनीतिक सहयोग, आर्थिक साझेदारी और सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास है। यह दौरा भारत की मध्य पूर्व नीति में जॉर्डन की अहम भूमिका को और सशक्त करता है तथा भविष्य में सहयोग के नए रास्ते खोलता है।




