UP: मतदाता सूची में दर्ज पते सुधारने के निर्देश, दशकों पुरानी गड़बड़ी को दूर करने का प्रयास

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची में दशकों से चली आ रही गड़बड़ी को सुधारने के लिए चुनाव आयोग ने कड़ा कदम उठाया है। आयोग ने सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) और बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को निर्देश दिए हैं कि वे मतदाता सूची में दर्ज पतों की गलतियों को ठीक करें। यह गड़बड़ी केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे राज्य में लगभग सभी मतदान केंद्रों में देखी जा रही है।

दशकों पुरानी गड़बड़ी

मतदाता सूची में कई जगह एक ही मकान नंबर अलग-अलग लोगों के नाम के सामने दर्ज हो गया है। यह गलती एसआईआर या गणना प्रक्रिया की वजह से नहीं हुई है, बल्कि यह दशकों से चली आ रही है। मुख्य कारण यह है कि कई गांवों में मकानों के नंबर नहीं होते और शहरों में भी कई मकानों के नंबर नहीं दर्ज होते। इस वजह से गांवों में काल्पनिक नंबर और शहरों में ‘0’ या ‘00’ जैसी प्रविष्टियाँ आम हो गई हैं। सीईओ नवदीप रिणवा ने बताया कि सूची के विभिन्न भागों को पर्याप्त और स्पष्ट अनुभागों में बांटना न होना भी इस समस्या का एक बड़ा कारण है। इससे मतदाता खोजने और वोटर लिस्ट के वितरण में असुविधा आती है।

सुधार के लिए उठाए जा रहे कदम

अब सभी ईआरओ को निर्देशित किया गया है कि वे अपने क्षेत्र के बूथों में मतदाता सूची को ध्यानपूर्वक पढ़ें और पते की गलतियों को ठीक करें। बूथों के विभाजन में नियमों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। आयोग ने मेरठ के डीएम और वहां के ईआरओ से विशेष रूप से स्थिति स्पष्ट करने के लिए पूछा है कि एक ही अनुभाग के मतदाताओं को अलग-अलग भागों में क्यों दर्ज किया गया। साथ ही, आयोग ने यह सुनिश्चित करने को कहा है कि प्रत्येक भाग पर्याप्त अनुभागों में विभाजित हो ताकि मतदाता खोजने में आसानी हो और गलतियां कम हों। बीएलओ को भी जिम्मेदारी दी गई है कि वे अपने क्षेत्रों की वोटर लिस्ट को जांचें और असंबंधित व्यक्तियों के समान मकान नंबर जैसी त्रुटियों को सुधारें। इससे न केवल मतदाता सूची सटीक होगी, बल्कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

मोबाइल नंबर और बिना आधार के लिंकिंग

चुनाव आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि बिना आधार कार्ड के भी वोटर कार्ड को मोबाइल नंबर से लिंक किया जा सकता है। इसके लिए फॉर्म-8 ऑफलाइन जमा करना होगा। यदि ऑनलाइन फॉर्म भरना हो तो ई-सिग्नेचर की जरूरत होगी और इसके लिए आधार नंबर से जुड़े मोबाइल नंबर की आवश्यकता होगी। इस प्रक्रिया से वोटरों की सूची को डिजिटल रूप से अपडेट करने में सुविधा मिलेगी और वोटर कार्ड के इस्तेमाल में आसानी होगी।

सुधार से होंगे लाभ

इस सुधार से मतदाता सूची अधिक विश्वसनीय बनेगी। मतदाता आसानी से अपने पते और हिस्सों की जानकारी प्राप्त कर पाएंगे। बूथों का सही विभाजन होने से चुनाव के समय भ्रम और असुविधा कम होगी। इसके अलावा, मोबाइल लिंकिंग की सुविधा से मतदाता किसी भी अपडेट या सूचना को सीधे मोबाइल पर प्राप्त कर सकेंगे। चुनाव आयोग का यह कदम दशकों पुरानी गड़बड़ी को दूर करने और उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके परिणामस्वरूप मतदाता सूची अधिक सटीक, सुव्यवस्थित और सुरक्षित बनेगी, जिससे आगामी चुनावों में जनता की भागीदारी और सुविधा दोनों बढ़ेंगी।

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