देश बनेगा बदलाव का साक्षी, कर्तव्य पथ पर गूंजेगी राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम
भारत इस साल गणतंत्र दिवस 2026 पर कई ऐतिहासिक बदलावों का साक्षी बनेगा। पहली बार परंपरा में बदलाव करते हुए देश की राजधानी में 26 जनवरी को आयोजित होने वाली परेड का आगाज और समापन राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम से किया जाएगा। इस अवसर पर देशवासियों और दुनिया के लोग कर्तव्य पथ से एक अलग अनुभव प्राप्त करेंगे, जहां वंदे मातरम को केवल एक गीत नहीं बल्कि आंदोलन और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक मानकर प्रस्तुत किया जाएगा।
वंदे मातरम: 150 साल पुराना गीत, नए अंदाज में
भारत सरकार ने इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में वंदे मातरम को केंद्र में रखा है। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अधीनस्थ संगीत नाटक अकादेमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा को इस कार्यक्रम के आयोजन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। परंपरा के अनुसार, परेड की शुरुआत हमेशा सेना के मार्च से होती थी, लेकिन इस बार इसे नए अंदाज में पेश किया जाएगा। आगाज में 200 लोक और जनजातीय कलाकार पारंपरिक वेशभूषा और वाद्य यंत्रों के साथ वंदे मातरम की धुन प्रस्तुत करेंगे। वहीं समापन पर 2,300 कलाकार वंदे मातरम की धुन पर लोकनृत्य प्रस्तुत करेंगे। इस क्रिएटिव थीम की रूपरेखा संध्या पुरेचा ने तैयार की है, जबकि संगीत संयोजन में एम. एम. कीरवानी, स्क्रिप्ट में सुभाष सहगल और कोरियोग्राफी में संतोष नायर योगदान देंगे।
सिमरन बाला: पुरुष दस्ते का नेतृत्व करने वाली पहली महिला
इस गणतंत्र दिवस की सबसे बड़ी खासियत होगी 26 वर्षीय असिस्टेंट कमांडेंट सिमरन बाला का पुरुष दस्ते का नेतृत्व। जम्मू-कश्मीर की सिमरन बाला केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 140 से अधिक पुरुष जवानों की कमान संभाएंगी। अधिकारियों के अनुसार, महिला अधिकारियों ने पहले भी अलग-अलग गणतंत्र दिवस टुकड़ियों का नेतृत्व किया है, लेकिन यह पहला मौका है जब कोई महिला अधिकारी पुरुष दस्ते का नेतृत्व कर रही है। परेड में सीआरपीएफ और एसएसबी की महिला डेयर-डेविल्स टीम बुलेट बाइक पर हैरतअंगेज करतब दिखाएगी।
सिमरन बाला का जीवन और करियर
सिमरन बाला जम्मू-कश्मीर के राजोरी जिले की रहने वाली हैं। वह अपने जिले की सीआरपीएफ में अधिकारी रैंक पर शामिल होने वाली पहली महिला हैं। उन्होंने जम्मू के गवर्नमेंट कॉलेज फॉर वुमेन से राजनीति विज्ञान में स्नातक किया। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सीएपीएफ परीक्षा पास करने के बाद, अप्रैल 2025 में उन्हें सीआरपीएफ में कमीशन मिला। वर्तमान में वह बस्तरिया बटालियन में तैनात हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल महिलाओं के लिए प्रेरणा है, बल्कि देश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
वंदे मातरम और परेड का नया अनुभव
इस साल गणतंत्र दिवस परेड में वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं रहेगा। यह पूरे देशवासियों को राष्ट्रीय गौरव, संस्कृति और लोक कला से जोड़ने का अवसर बनेगा। परेड में देशभर के कलाकार अपनी पारंपरिक वेशभूषा और वाद्य यंत्रों के साथ इस गीत को प्रस्तुत करेंगे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं और देशवासियों को यह संदेश देना है कि वंदे मातरम केवल राष्ट्रगीत नहीं बल्कि कर्तव्य, संघर्ष और सम्मान का प्रतीक है। आगाज से लेकर समापन तक यह परेड नए दृष्टिकोण और नए अनुभवों से भरी होगी। 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस परेड एक ऐतिहासिक मोड़ पर होगी। वंदे मातरम की धुन और सिमरन बाला का नेतृत्व देशवासियों को गर्व और प्रेरणा देगा। यह दिन न केवल परंपरा और इतिहास का जश्न है, बल्कि सशक्त महिला नेतृत्व और लोक कला के माध्यम से राष्ट्रीय पहचान को भी मजबूत करेगा।
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