Bihar Chunav 2025 LIVE: पहले चरण के प्रचार का समय हुआ समाप्त, राजनीतिक सरगर्मियां तेज़

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का पहले चरण का प्रचार-प्रसार आज समाप्त हो गया। पहले चरण में 18 जिलों की कुल 121 सीटों पर मतदान होगा। आज प्रचार का अंतिम दिन था और सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों के पक्ष में जोरदार प्रचार किया। इस दौरान नेताओं ने विरोधियों पर भी खुला हमला किया। कई नेताओं ने अपने पुराने दलों को छोड़कर नई पार्टियों का दामन थामा, जिससे चुनावी समीकरणों में बड़े बदलाव देखने को मिले।

चर्चित सीटें और उम्मीदवार

पहले चरण के चुनाव में कई सीटें विशेष रूप से चर्चा में हैं। अलीनगर, मोकामा, लखीसराय, राघोपुर, तारापुर और सरायरंजन जैसी सीटों पर उम्मीदवारों और उनके प्रचार ने जनता का ध्यान खींचा। इन सीटों पर मुकाबला बेहद कड़ा रहने की उम्मीद है, खासकर उन जगहों पर जहां बड़े और प्रभावशाली नेता चुनाव लड़ रहे हैं। दरभंगा प्रमंडल की 10 में से 9 सीटें 2020 में एनडीए ने जीती थीं, वहीं समस्तीपुर की सरायरंजन सीट पर भी कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है।

मतदान की तैयारियां

6 नवंबर को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक मतदान होगा। पटना जिले में कुल 5665 बूथों पर वोटिंग होगी और सहायक मतदान केंद्रों की संख्या 12 है। कुल 2099 मतदान केंद्रों को क्रिटिकल माना गया है। शहरी क्षेत्रों में उम्मीद जताई जा रही है कि मतदान प्रतिशत पहले से अधिक रहेगा।

आचार संहिता उल्लंघन और झड़पें

इस बीच आचार संहिता उल्लंघन के कई मामले सामने आए हैं। कई नेताओं पर केस दर्ज किए गए हैं, और चुनावी हलफनामों से उनकी संपत्तियों की जानकारी सार्वजनिक हुई है। गोपालगंज में जेडीयू और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई। कुचायकोट विधानसभा से जेडीयू प्रत्याशी अमरेंद्र कुमार उर्फ पप्पू पांडेय और कांग्रेस प्रत्याशी हरिनारायण कुशवाहा के समर्थक आमने-सामने आ गए। इस झड़प में एक युवक गंभीर रूप से घायल हुआ और उसे सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।

नेताओं के विवादित बयान और प्रतिक्रिया

केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के हालिया बयान ने राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी है। उन्होंने खुलकर कहा कि गरीबों, दलितों और अतिपिछड़ों को मतदान के लिए घर से बाहर नहीं निकलने देना चाहिए। इस बयान पर बिहार के नेता और विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। तेजस्वी यादव ने इसे लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ बताया और प्रशासन पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि मतदान में हर नागरिक का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए और कोई भी इसे प्रभावित नहीं कर सकता।

चुनावी रणनीति और भविष्य

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पहले चरण के चुनाव में नेताओं के प्रचार और रणनीति का सीधा असर मतदाताओं की पसंद पर पड़ेगा। चुनाव आयोग की निगरानी में मतदान निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होने की उम्मीद है। इस चरण के नतीजे पूरे राज्य के राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकते हैं और अगले चरणों की रणनीति को तय कर सकते हैं।

लोकतंत्र और जनता का अधिकार

बिहार चुनाव की यह लड़ाई केवल सीटों पर ही नहीं बल्कि जनता के विश्वास, दलितों और गरीबों के अधिकारों की रक्षा और लोकतंत्र के भविष्य की दिशा तय करने की भी है। 6 नवंबर को होने वाले मतदान के बाद ही स्पष्ट होगा कि कौन से दल और उम्मीदवार जनता के समर्थन से आगे बढ़ेंगे। पहले चरण के लिए तैयारियों, प्रचार और विवादों के बीच बिहार का राजनीतिक वातावरण काफी गर्माया हुआ है। आने वाले कुछ दिन राज्य की राजनीतिक दिशा तय करेंगे और यह देखा जाएगा कि जनता किसे अपने प्रतिनिधि के रूप में चुनती है।

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