फडणवीस की प्रतिष्ठा और उद्धव ठाकरे की साख दांव पर

मुंबई में बीएमसी चुनाव की तैयारियाँ तेज़ हैं। करीब 44 महीनों से टल रहे चुनाव अब होने जा रहे हैं, और इसी के साथ महानगर की राजनीति एक बार फिर गर्माती दिखाई दे रही है। ऊँची-ऊँची इमारतों और व्यस्त सड़कों से घिरे घाटकोपर पूर्व इलाके में मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है। यहां बीजेपी और उद्धव बालासाहब ठाकरे (UBT) की प्रतिष्ठा का बड़ा संघर्ष होता दिख रहा है।

घाटकोपर पूर्व: पांच वॉर्ड और कई दावेदारों का मुकाबला

घाटकोपर पूर्व में कुल पाँच वॉर्ड हैं, और इन सभी पर बीजेपी, शिंदे गुट, UBT, एनसीपी व मनसे जैसे दलों का जोर है।
2017 में बीजेपी को यहाँ दो सीटें मिली थीं, जबकि अविभाजित शिवसेना, मनसे और एनसीपी को एक-एक सीट मिली थी। लेकिन अब समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं।

शिवसेना और एनसीपी के विभाजन के बाद पुराने नगरसेवक अलग-अलग गुटों में शामिल हो गए हैं।

शिवसेना की पूर्व नगरसेवक रुपाली आवले,

और मनसे के पूर्व नगरसेवक परमेश्वर कदम,
अब शिंदे गुट में हैं।

यही वजह है कि शिंदे गुट 2017 की शिवसेना सीटों पर दावा कर रहा है।

पुनर्विकास और एसआरए की देरी बनी बड़ी चुनावी चुनौती

घाटकोपर पूर्व का सबसे बड़ा मुद्दा है पुरानी इमारतों का रीडिवेलपमेंट।
बहुत से प्रोजेक्ट शुरू होने के बावजूद समय पर पूरे नहीं हुए, जिससे लोग लगातार आंदोलन कर रहे हैं।

स्लम क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं जैसे

पानी

सफाई

सड़क

जलनिकासी
की कमी भी स्थानीय मुद्दों में सबसे ऊपर है।

इन बुनियादी समस्याओं के चलते लोग बदलाव की उम्मीद में हैं, जिसका सीधा असर चुनावी हवा पर पड़ सकता है।

आरक्षण बदला तो बढ़ी हलचल: नए चेहरों को मौका मिलेगा

आरक्षण लॉटरी के बाद वॉर्डों की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है।

वॉर्ड 132, जहां से पराग शाह बीजेपी से नगरसेवक और अब विधायक हैं, वह अब सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित हो गया है।

वॉर्ड 131 भी सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित है।

वॉर्ड 130, जहां से बीजेपी की बिदु त्रिवेदी जीती थीं, अब ओबीसी आरक्षित श्रेणी में चला गया है।

इन बदलावों की वजह से पुराने नगरसेवकों को नए वॉर्ड ढूँढने पड़ रहे हैं, जबकि नए नेताओं के लिए मैदान खुल गया है। इससे टिकट वितरण में जोरदार खींचतान तय है।

मनसे और UBT की नज़दीकी: मराठी वोट बैंक में पड़ेगा असर

ईशान्य मुंबई परंपरागत रूप से मराठी वोटरों का मजबूत इलाका रहा है। पहले मनसे और शिवसेना के बीच वोटों का बंटवारा होता था।
लेकिन अब मनसे और UBT के एकसाथ आने की चर्चा ने चुनावी राजनीति को नया मोड़ दे दिया है।

यह गठजोड़ UBT को घाटकोपर पूर्व में मजबूती दे सकता है, क्योंकि

मनसे का प्रभाव

शिवसेना के पारंपरिक मराठी वोट
एकजुट होकर बीजेपी के सामने चुनौती बन सकते हैं।

ईशान्य मुंबई की लोकसभा सीट से UBT के संजय दीना पाटील सांसद चुने जा चुके हैं, और घाटकोपर पूर्व इसी क्षेत्र में आता है। इसलिए इसका असर सीधे बीएमसी चुनाव पर पड़ने के आसार हैं।

बीजेपी का बढ़ता प्रभाव: गुजराती वोट बैंक बना ताकत

घाटकोपर पूर्व में मराठी वोटरों के बाद सबसे बड़ी आबादी गुजराती समुदाय की है। बीजेपी परंपरागत रूप से इस वोट बैंक में मज़बूत रही है।

इसके अलावा

कांग्रेस नेता प्रवीण छेड़ा का बीजेपी में आना,

और कमजोर हुई स्थानीय कांग्रेस,
बीजेपी को फायदा दे सकती है।

कांग्रेस अब यहाँ मुकाबले में लगभग नज़र नहीं आ रही।

मिली-जुली आबादी और जटिल समीकरण

घाटकोपर पूर्व विधानसभा क्षेत्र की आबादी लगभग 14 लाख 6 हजार है।
यहां:

मराठी

गुजराती

दलित

उत्तर भारतीय

वोटर बड़ी संख्या में हैं, इसलिए चुनावी समीकरण बहुत संवेदनशील और बहुस्तरीय हैं।

बीएमसी चुनाव में घाटकोपर पूर्व उन गिने-चुने वॉर्डों में से एक है, जहां मुकाबला बेहद रोमांचक होने वाला है।

देवेंद्र फडणवीस के लिए यह प्रतिष्ठा का सवाल है,

जबकि उद्धव ठाकरे के लिए यह साख बचाने की लड़ाई है।

पुनर्विकास, आरक्षण, मराठी वोट बैंक और दल-बदल—इन सबने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है।

आने वाले दिनों में यह तय होगा कि घाटकोपर पूर्व किसके साथ खड़ा होता है।

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