प्रतापगढ़ जिले में बहुचर्चित गैंगरेप मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश पारुल वर्मा की अदालत ने एक दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही उस पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। यह फैसला लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे पीड़ित पक्ष के लिए अहम माना जा रहा है।
मामले के अनुसार, मानिकपुर क्षेत्र के रहने वाले दीपू को अदालत ने दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य और गवाहों के आधार पर आरोपी का अपराध सिद्ध हुआ है। वहीं, मामले में शामिल दो अन्य आरोपियों को पहचान न होने के चलते संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया।
यह घटना वर्ष 2015 की है, जब दो किशोरियों के साथ जंगल में गैंगरेप की वारदात हुई थी। इस जघन्य अपराध ने उस समय पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी और लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला था। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी और आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया था।
लंबी सुनवाई के बाद अब अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए एक आरोपी को दोषी ठहराया है, जबकि अन्य दो को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। अदालत ने दोषी को सख्त सजा देते हुए समाज में ऐसे अपराधों के खिलाफ कड़ा संदेश देने की कोशिश की है।
इस फैसले के बाद स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित और कठोर सजा जरूरी है, ताकि अपराधियों में कानून का डर बना रहे। वहीं पीड़ित पक्ष ने अदालत के फैसले पर संतोष जताया है। फिलहाल यह मामला न्याय व्यवस्था और कानून के प्रति लोगों के विश्वास को मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
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