दिव्या दत्ता: 48 की उम्र में भी सिंगल, जानिए उनकी कहानी और सोच

हिंदी और पंजाबी सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री दिव्या दत्ता ने फिल्मों में अपनी अलग पहचान बनाई है। शाहरुख खान और अभिषेक बच्चन जैसी बॉलीवुड हस्तियों के साथ काम करने वाली दिव्या ने अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीता। 1994 में अपने करियर की शुरुआत करने वाली दिव्या ने पंजाबी फिल्म ‘शहीद-ए-मोहब्बत बूटा सिंह’ में ‘जैनब’ का किरदार निभाकर खास पहचान बनाई। लेकिन जितना उनके अभिनय करियर पर चर्चा होती है, उतना ही उनके निजी जीवन पर भी लोग सवाल उठाते रहे हैं। 48 साल की उम्र में दिव्या आज भी सिंगल हैं और इसके पीछे की वजह उन्होंने खुद साझा की है।

पुराने रिश्तों से मिली सीख

दिव्या दत्ता ने अपने पुराने रिश्तों के अनुभवों से कई महत्वपूर्ण सबक सीखे हैं। उनका मानना है कि किसी भी रिश्ते या शादी में सफलता पाने के लिए दोनों पक्षों की बराबर भागीदारी और समझदारी जरूरी होती है। उन्होंने कहा कि उन्होंने प्यार की तलाश कई बार की, लेकिन अनुभवों ने उन्हें यह सिखाया कि सही संतुलन और समझ के बिना रिश्ते मुश्किल होते हैं। मैंने कई गलतियाँ की और उनसे सीख भी ली। प्यार की तलाश में कई बार कोशिश की, लेकिन सही व्यक्ति के साथ ही संतुलन संभव है। हाई-प्रोफाइल जीवन होने की वजह से रिश्ते हमेशा आसान नहीं होते।” – दिव्या दत्ता

शादी और रिश्तों के प्रति दृष्टिकोण

दिव्या ने बताया कि उन्होंने पहले कुछ रिश्तों में समय बिताया, लेकिन महसूस किया कि वे उनके लिए सही मैच नहीं थे। समय के साथ उन्होंने यह समझा कि जीवन साथी के बिना भी जीवन खुशहाल हो सकता है। पैंडेमिक के दौरान उन्होंने खुद से यह सवाल किया कि क्या बाहर जाकर प्यार की तलाश जरूरी है – और उन्होंने तय किया कि अब यह प्राथमिकता नहीं। दिव्या का मानना है कि शादी तभी meaningful होती है जब सही व्यक्ति मिले। अन्यथा अकेले रहकर जीवन में आगे बढ़ना ही बेहतर है।

व्यक्तिगत अनुभवों का महत्व

अभिनेत्री का कहना है कि शादी न करने का फैसला उन्होंने अपने अनुभवों और जीवन की सीखों के आधार पर लिया है।जिंदगी में कई गलत हाथ पकड़े और उनसे बहुत कुछ सीखा। जीवन में ट्रायल-एंड-एरर चलता रहता है। शुरुआत में फिल्मों जैसी कल्पनाएँ थीं, लेकिन समय के साथ समझ आया कि पूर्णता की तलाश जरूरी नहीं है। दिव्या दत्ता की कहानी यह बताती है कि प्यार और शादी की प्राथमिकता पूरी तरह व्यक्तिगत अनुभव, मानसिक संतुलन और समझदारी पर निर्भर करती है। सही इंसान के बिना रिश्तों में समय और ऊर्जा बर्बाद करने से बेहतर है कि अपनी खुशियों और प्राथमिकताओं को खुद संभाला जाए।

यह भी पढ़े

https://www.tarangvoice.com/india-energy-week-2026-prime-minister-narendra-modi-to-virtually-inaugurate-the-fourth-edition/

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here