रीवा में अंतिम सांस, अयोध्या में होगा अंतिम संस्कार; सीएम योगी समेत संत समाज में शोक

राम जन्मभूमि आंदोलन को वैचारिक दिशा देने वाले, श्रीराम जन्मभूमि न्यास के संस्थापक सदस्य और पूर्व सांसद डॉ. रामविलास वेदांती अब हमारे बीच नहीं रहे। उनके निधन से अयोध्या ही नहीं, बल्कि पूरे देश के सनातन समाज में शोक की लहर फैल गई है। उनका जीवन राम, राष्ट्र और धर्म के लिए समर्पित रहा, जिसे भारतीय जनमानस सदैव स्मरण करेगा।

रीवा में कार्यक्रम के दौरान बिगड़ी तबीयत

प्राप्त जानकारी के अनुसार, डॉ. रामविलास वेदांती मध्य प्रदेश के रीवा में एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान भोजन के बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तुरंत स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां हालत गंभीर देखते हुए भोपाल एम्स रेफर करने की तैयारी की गई।

एयर एंबुलेंस न उतर पाने से नहीं मिल सकी मदद

स्थिति नाजुक होने पर एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की गई, लेकिन खराब मौसम और घने कोहरे के कारण विमान लैंड नहीं कर सका। इसी दौरान इलाज के अभाव में उनका निधन हो गया। उनके आकस्मिक निधन की खबर से संत समाज और उनके अनुयायियों में गहरा शोक फैल गया।

16 दिसंबर को अयोध्या में निकलेगी अंतिम शोभायात्रा

वशिष्ठ पीठाधीश्वर डॉ. राघवेश दास वेदांती ने जानकारी दी कि पूज्य महाराज की अंतिम शोभायात्रा 16 दिसंबर 2025, मंगलवार को अयोध्या में निकाली जाएगी। यह शोभायात्रा हिंदू धाम आश्रम से सुबह लगभग 10:30 बजे के बाद प्रारंभ होगी। इसमें देशभर से संत-महात्मा, रामभक्त, श्रद्धालु और गणमान्य नागरिक शामिल होंगे।

राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख विचारक

डॉ. रामविलास वेदांती राम जन्मभूमि आंदोलन के उन अग्रणी संतों में शामिल थे, जिन्होंने दशकों तक इस संघर्ष को वैचारिक मजबूती दी। वे आंदोलन के संस्थापक सदस्यों में रहे और संसद से लेकर संत समाज तक राम मंदिर निर्माण के लिए मुखर भूमिका निभाई। उनका योगदान केवल आंदोलन तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना को भी जागृत किया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जताया शोक

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डॉ. रामविलास वेदांती के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनका जाना सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। सीएम योगी ने उन्हें राम जन्मभूमि आंदोलन का मजबूत स्तंभ बताते हुए कहा कि उनका त्यागमय जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा रहेगा।

 

त्याग, तपस्या और सेवा का जीवन

डॉ. वेदांती का संपूर्ण जीवन धर्म, समाज और राष्ट्र को समर्पित रहा। संत के रूप में उन्होंने सादगी, अनुशासन और सेवा को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाया। उनके विचार, वक्तव्य और संघर्षशीलता ने लाखों लोगों को प्रेरित किया। वे न केवल संत थे, बल्कि एक प्रखर विचारक और मार्गदर्शक भी थे।

संत समाज और रामभक्तों में शोक की लहर

उनके निधन की खबर मिलते ही अयोध्या समेत देशभर में श्रद्धांजलि सभाओं का दौर शुरू हो गया। रामभक्तों और संत समाज में गहरा शोक व्याप्त है। अयोध्या में उनके दर्शन और अंतिम विदाई के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

डॉ. रामविलास वेदांती का जीवन रामभक्ति, राष्ट्रसेवा और सनातन संस्कृति की रक्षा का प्रतीक रहा। उनका जाना एक युग का अंत है, लेकिन उनके विचार और योगदान सदैव जीवित रहेंगे।

 

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