डिब्रूगढ़ के मोरन बाईपास पर बनी ELF से उतरे प्रधानमंत्री, सामरिक ताकत को मिली नई मजबूती
पूर्वोत्तर भारत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण तब दर्ज हुआ जब प्रधानमंत्री Narendra Modi ने असम के डिब्रूगढ़ जिले में मोरन बाईपास पर बनी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) पर वायुसेना के विशेष विमान से लैंडिंग की। पहली बार किसी नेशनल हाईवे पर प्रधानमंत्री के विमान की औपचारिक लैंडिंग कराई गई, जिससे यह हाईवे स्ट्रिप अब देश के रणनीतिक एयर नेटवर्क का हिस्सा बन गई है। यह पहल न केवल असम बल्कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र की सामरिक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। इस कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री की मौजूदगी में हुई, जिसने इसे और भी विशेष बना दिया।
सी-130जे सुपर हरक्यूलिस से ऐतिहासिक लैंडिंग
प्रधानमंत्री ने भारतीय वायुसेना के अत्याधुनिक परिवहन विमान C-130J Super Hercules से इस आपातकालीन रनवे पर लैंड किया। यह विमान कठिन परिस्थितियों में संचालन के लिए जाना जाता है और छोटे या अस्थायी रनवे पर उतरने की क्षमता रखता है। प्रधानमंत्री के उतरते ही यह स्पष्ट हो गया कि मोरन बाईपास पर बनी यह स्ट्रिप अब केवल एक सड़क नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे का अहम हिस्सा है। इस अवसर पर वायुसेना और राज्य प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
सुखोई Su-30MKI ने भरी उड़ान
कार्यक्रम के दौरान भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान Sukhoi Su-30MKI ने भी इसी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी से उड़ान भरी। प्रधानमंत्री और उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने इस दृश्य को प्रत्यक्ष रूप से देखा। यह प्रदर्शन इस बात का प्रतीक था कि यह सुविधा केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों में लड़ाकू विमानों के संचालन के लिए पूरी तरह सक्षम है। इससे स्पष्ट संकेत गया कि देश की वायु सुरक्षा व्यवस्था अब और अधिक लचीली और प्रभावी हो गई है।
क्या है इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF)?
इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी यानी ELF एक विशेष रूप से तैयार की गई हाईवे स्ट्रिप होती है, जिसे युद्ध या आपातकालीन परिस्थितियों में वैकल्पिक रनवे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। सामान्य समय में यह एक साधारण राजमार्ग की तरह कार्य करती है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर इसे कुछ ही समय में एयरस्ट्रिप में बदला जा सकता है। इन स्ट्रिप्स को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि यहां लड़ाकू विमान, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर सुरक्षित रूप से उतर और उड़ान भर सकें। ऐसी सुविधाएं दुर्गम या सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष रूप से उपयोगी साबित होती हैं, जहां पारंपरिक एयरबेस सीमित हो सकते हैं।
पूर्वोत्तर में रणनीतिक बढ़त
असम का डिब्रूगढ़ जिला सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। पूर्वोत्तर क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के निकट स्थित है, ऐसे में यहां इस तरह की आपात लैंडिंग सुविधा का होना सुरक्षा के लिहाज से बड़ा कदम है। केंद्र सरकार की योजना के तहत देशभर में कुल 28 इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी विकसित की जानी हैं। इनमें से पांच असम में बनाई जाएंगी। इससे स्पष्ट है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र को रणनीतिक रूप से सशक्त बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
राष्ट्रीय सुरक्षा को नई दिशा
मोरन बाईपास पर बनी यह ELF देश की रक्षा तैयारियों को एक नई दिशा देती है। इससे वायुसेना को आपातकालीन परिस्थितियों में तेज प्रतिक्रिया देने की क्षमता मिलेगी। साथ ही प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत और बचाव कार्यों में भी इन स्ट्रिप्स का उपयोग किया जा सकेगा। प्रधानमंत्री की ऐतिहासिक लैंडिंग ने इस परियोजना को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। यह कदम आत्मनिर्भर और मजबूत भारत की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। असम की धरती पर बना यह हाईवे एयरस्ट्रिप अब केवल परिवहन का मार्ग नहीं, बल्कि देश की सामरिक शक्ति और सुरक्षा प्रतिबद्धता का प्रतीक बन चुका है।
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