103 वर्षीय नौसैनिक वेटरन, पूर्व-CHME, का निधन रॉयल नेवी व भारतीय नौसेना की गौरवशाली विरासत के धनी

करनाल, 20 नवम्बर कर्णाल जिला और रक्षा समुदाय आज गहरे शोक में है। सरदार सुजान सिंह साहब, पूर्व-CHME और 103 वर्षीय नौसैनिक वेटरन, जिन्होंने रॉयल नेवी और भारतीय नौसेना दोनों में सेवाएं देकर इतिहास रचा, का निधन हो गया। उनका जाना केवल एक परिवार का निजी दुःख नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र और देश की ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई संभव नहीं। उनका जीवन भारत के नौसैनिक इतिहास का जीवंत अध्याय माना जाता था एक ऐसा अध्याय जो अब स्मृतियों में सिमट गया है।

समुद्री जीवन की असाधारण यात्रा

स्वतंत्रता से पूर्व जन्मे सरदार सुजान सिंह साहब ने अपने नौसैनिक करियर की शुरुआत रॉयल नेवी से की थी। यह वह दौर था जब भारतीय युवक विश्व युद्ध से प्रभावित वैश्विक परिस्थितियों में समुद्री सुरक्षा का हिस्सा बनने को तैयार हो रहे थे। विभाजन के उपरांत उन्होंने भारतीय नौसेना में अपनी सेवाएं जारी रखीं।
नौसेना की नई संरचना, बदलते ऑपरेशनल ढांचे और बढ़ती समुद्री जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने अपनी भूमिका को शानदार रूप से निभाया। पुर्तगाल ऑपरेशन्स में उनका योगदान उनकी वीरता, कौशल और अनुशासन का अद्वितीय उदाहरण था। नौसैनिक जगत में उन्हें “चलते-फिरते नौसैनिक इतिहास” के रूप में जाना जाता था, क्योंकि उन्होंने स्वतंत्रता-पूर्व से लेकर आधुनिक नौसेना तक के बदलावों को स्वयं जिया और संजोया।

सेवा केवल वर्दी तक सीमित नहीं

सरदार सुजान सिंह साहब का जीवन केवल सैन्य सेवा तक सीमित नहीं था। वह आध्यात्मिक और सामुदायिक मूल्यों के प्रति गहराई से प्रतिबद्ध थे। उन्होंने बंबई में नेवल गुरुद्वारा साहिब की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो आज हजारों नौसैनिकों और उनके परिवारों के लिए एक केंद्रीय आध्यात्मिक स्थान बन चुका है।

अपने जीवनभर उन्होंने उत्तर प्रदेश और हरियाणा के अनेक गुरुद्वारों में उदारतापूर्वक दान दिया। अनेक सामाजिक और धर्मार्थ कार्य उनके सहयोग से संचालित हुए। सरलता, विनम्रता, तीव्र स्मरणशक्ति और गहरी आध्यात्मिक बुद्धि उनके व्यक्तित्व के प्रमुख आयाम थे। कई सेवारत और रिटायर्ड अधिकारी उन्हें अपने मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत के रूप में देखते थे।

समुदाय का प्रिय एक युग का अंत

उनके निधन से झारनाल गांव ने एक ऐसा रत्न खो दिया है जिसकी उपस्थिति ही समुदाय के लिए गर्व का विषय थी। उनका जीवन इस बात का प्रमाण था कि सच्ची महानता पद, पुरस्कार या प्रसिद्धि से नहीं, बल्कि सेवा, बलिदान और मानवीय संवेदनाओं से आती है।

परिवार ने घोषणा की है कि स्वर्गीय आत्मा की शांति और श्रद्धांजलि स्वरूप पूरे गांव के लिए लंगर सेवा आयोजित की जाएगी। यह उनकी आजीवन सेवा-भावना का प्रत्यक्ष प्रतिबिंब है।

नेवल मुख्यालय को आधिकारिक रूप से सूचित किया जा चुका है, और नौसेना के अधिकारी व जवान अंतिम सम्मान देने के लिए उपस्थित रहेंगे।

अंतिम संस्कार और शोक संदेश

उनका अंतिम संस्कार 21 नवंबर को सुबह 11:30 बजे, शेखपुरा, अशनध रोड, कर्णाल में संपन्न होगा।

डिफेंस ऑफिसर वेलफेयर एसोसिएशन, सेंट कबीर पब्लिक स्कूल, और कर्णाल के कई गणमान्य व्यक्तियों ने शोक संदेश भेजे हैं। लेफ्टिनेंट जनरल डी.डी.एस. संधू, ब्रिगेडियर रणधीर सिंह, कर्नल पी.एस. बिंद्रा समेत पूरे DOWA परिवार ने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

सरदार सुजान सिंह साहब का जीवन इतिहास, सेवा और मानवीयता का ऐसा संगम था, जिसे आने वाली पीढ़ियाँ प्रेरणा के रूप में याद करेंगी। कर्णाल, नौसेना समुदाय और देश उनके योगदान को कभी नहीं भूल पाएंगे।