मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पेश किया साफ रोडमैप, ओला-उबर के साथ बैठक से लेकर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तक कई अहम फैसले
दिल्ली में बढ़ते ट्रैफिक जाम और वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने एक व्यापक और दीर्घकालिक रणनीति तैयार की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि जब तक सड़कों पर वाहनों की संख्या कम नहीं होगी, तब तक प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है। इसी सोच के तहत सरकार साझा टैक्सी सेवाओं और इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को परिवहन नीति का केंद्र बना रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का मूल उद्देश्य यह है कि कम से कम वाहन अधिक से अधिक यात्रियों को सेवा दें। इससे न केवल ट्रैफिक सुचारु होगा, बल्कि प्रदूषण में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। साझा परिवहन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को इस रणनीति की रीढ़ बताते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार जल्द ही ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क कंपनियों जैसे ओला और उबर के साथ विशेष बैठक करेगी।
साझा टैक्सी सेवाओं की वापसी पर जोर
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि कोरोना काल से पहले दिल्ली में साझा टैक्सी सेवाएं सक्रिय थीं, जो लोगों के लिए किफायती और सुविधाजनक विकल्प थीं। अब सरकार इन्हें दोबारा शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। प्रस्तावित बैठक में साझा टैक्सी सेवाओं को फिर से लागू करने, पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा देने और महिला ड्राइवरों की भागीदारी बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।
महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि टैक्सी सेवाओं में महिलाओं की संख्या बढ़ाना सरकार के एजेंडे में शामिल है। इससे न केवल महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे, बल्कि यात्रियों के लिए भी सुरक्षित माहौल बनेगा।
निजी इलेक्ट्रिक वाहन भी बन सकेंगे टैक्सी
दिल्ली सरकार की एक और अहम योजना निजी इलेक्ट्रिक वाहनों को टैक्सी सेवाओं से जोड़ने की है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इससे यात्रियों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे और पेट्रोल-डीजल वाहनों पर निर्भरता कम होगी। यह कदम प्रदूषण घटाने के साथ-साथ इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार भी तेज करेगा।
वाहन फिटनेस पर सख्ती
वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सरकार ऑटोमैटिक कमर्शियल व्हीकल फिटनेस टेस्टिंग स्टेशनों का नेटवर्क तेजी से बढ़ा रही है। झुलझुली स्थित फिटनेस सेंटर पहले से चालू है, जहां हर साल लगभग 70 हजार वाहनों की जांच हो रही है। बुराड़ी के केंद्र को अपग्रेड किया जा रहा है, जबकि नंद नगरी और तुगलकाबाद (तेखखंड) में दो नए केंद्र मार्च तक शुरू होने की संभावना है।
इन चारों केंद्रों से हर साल ढाई से तीन लाख वाहनों की फिटनेस जांच संभव होगी। इसके अलावा डीटीसी के पांच डिपो बवाना, गाजीपुर, सावदा घेवरा, जीटीके डिपो और दीचाऊ कलां में नए ऑटोमैटिक फिटनेस स्टेशन लगाने का फैसला किया गया है, जिन्हें सभी आवश्यक मंजूरी मिल चुकी है।
नई परिवहन नीति में ईवी की केंद्रीय भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि कई शोध रिपोर्ट यह साबित कर चुकी हैं कि वायु प्रदूषण में वाहनों की बड़ी भूमिका है। इसी वजह से मेट्रो, ई-बस और अन्य इलेक्ट्रिक वाहनों को नई परिवहन नीति का आधार बनाया गया है। दिल्ली मेट्रो फेज-5ए के कुछ कॉरिडोर को केंद्र सरकार से सैद्धांतिक मंजूरी मिलना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदूषण पर काबू केवल तात्कालिक उपायों से नहीं होगा। इसके लिए लंबी अवधि की ठोस नीति जरूरी है। इसी के तहत धूल नियंत्रण, निर्माण स्थलों की सख्त निगरानी, सड़कों की मैकेनिकल सफाई, खुले में कचरा जलाने पर रोक और हॉटस्पॉट इलाकों में एंटी-स्मॉग गन जैसी व्यवस्थाएं लगातार लागू की जा रही हैं।
कुल मिलाकर, दिल्ली सरकार का यह रोडमैप न केवल ट्रैफिक और प्रदूषण की समस्या से निपटने की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि राजधानी को एक स्वच्छ, सुरक्षित और टिकाऊ शहर बनाने की ओर भी संकेत करता है।




