नोएडा एयरपोर्ट तैयार: रनवे 28 पर सफल लैंडिंग, दिसंबर से शुरू होंगी उड़ानें
नोएडा: उत्तर प्रदेश का ड्रीम प्रोजेक्ट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Jewar Airport) अब अपने अंतिम चरण में है। मंगलवार को हवाई अड्डे के रनवे 28 पर भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) का विशेष विमान सफलतापूर्वक उतरा, जिससे यह पुष्टि हो गई कि हवाई पट्टी उड़ान संचालन के लिए पूरी तरह तैयार है। इस ट्रायल लैंडिंग के साथ एयरपोर्ट के कैलिब्रेशन प्रोसेस को भी पूरा घोषित कर दिया गया है।
कैलिब्रेशन प्रक्रिया सफल
कैलिब्रेशन प्रक्रिया हवाई अड्डे के निर्माण और उड़ान सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। इसमें रनवे, इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS), नेविगेशनल एड्स और कम्युनिकेशन सिस्टम्स की जांच की जाती है। मंगलवार को AAI के विशेष विमान ने रनवे 28 पर कई राउंड उड़ान भरकर तकनीकी परीक्षण पूरे किए। अधिकारियों के अनुसार, ILS और अन्य उपकरण पूरी तरह से सटीक पाए गए हैं।
इस पूरी प्रक्रिया की रिपोर्ट अब नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को भेजी जाएगी। DGCA द्वारा रिपोर्ट की समीक्षा के बाद एयरोड्रम लाइसेंस जारी किया जाएगा। यह लाइसेंस ही किसी भी एयरपोर्ट पर वाणिज्यिक उड़ानें शुरू करने की अंतिम अनुमति देता है।
दिसंबर से शुरू होंगी उड़ानें
अधिकारियों का कहना है कि नोएडा एयरपोर्ट को नवंबर के अंत तक DGCA से लाइसेंस मिलने की उम्मीद है। इसके बाद दिसंबर 2025 से यहां से घरेलू और कार्गो (मालवाहक) उड़ानें शुरू की जाएंगी। पहले चरण में हवाई अड्डे से दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और चेन्नई के लिए सीधी उड़ानें शुरू करने की योजना है।
एयरपोर्ट संचालक कंपनी Yamuna International Airport Pvt. Ltd. (YIAPL) ने बताया कि दिसंबर के पहले सप्ताह तक यात्री टर्मिनल, रनवे लाइटिंग, टैक्सीवे और एप्रन एरिया पूरी तरह ऑपरेशनल हो जाएंगे।
देश का चौथा सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनने की ओर
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट देश का चौथा सबसे बड़ा हवाई अड्डा बनने जा रहा है। इसका पहला चरण 1,334 हेक्टेयर में फैला हुआ है और यहां 70 लाख यात्रियों के सालाना आवागमन की क्षमता होगी। आगामी वर्षों में जब इसका पूरा विकास पूरा हो जाएगा, तो यह क्षमता बढ़कर 12 करोड़ यात्रियों तक पहुंच जाएगी।
एयरपोर्ट को पर्यावरण-अनुकूल और ग्रीन एनर्जी बेस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ डिजाइन किया गया है। सौर ऊर्जा से संचालित टर्मिनल, रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और इलेक्ट्रिक ग्राउंड व्हीकल्स यहां की खासियत होंगी।
रोजगार और निवेश के नए अवसर
नोएडा एयरपोर्ट का संचालन शुरू होने से न केवल वेस्ट यूपी, बल्कि पूरे उत्तर भारत के आर्थिक विकास में नई गति आने की उम्मीद है। सरकार के अनुसार, पहले चरण के संचालन से लगभग 50,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। इसके साथ ही, एयरपोर्ट के आसपास एविएशन सिटी, कार्गो हब, होटल और लॉजिस्टिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं, जिससे निवेश के बड़े अवसर खुलेंगे।
यात्रियों की सुविधाओं पर विशेष ध्यान
एयरपोर्ट में यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता दी जा रही है। यहां डिजिटल टिकटिंग सिस्टम, फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी, ऑटोमैटिक बैगेज हैंडलिंग सिस्टम और स्मार्ट सिक्योरिटी चेक जैसी आधुनिक तकनीकें लगाई जा रही हैं। साथ ही, एयरपोर्ट से दिल्ली, नोएडा और ग्रेटर नोएडा को जोड़ने के लिए रैपिड रेल कॉरिडोर और यमुना एक्सप्रेसवे से डायरेक्ट कनेक्टिविटी की व्यवस्था की जा रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “नोएडा एयरपोर्ट उत्तर भारत के विकास का प्रतीक बनेगा। यह न केवल एयर कनेक्टिविटी बढ़ाएगा, बल्कि निवेश और पर्यटन को भी नई ऊंचाई देगा।”
उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार एयरपोर्ट के साथ-साथ आसपास के इलाकों में इंडस्ट्रियल टाउनशिप और मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क विकसित कर रही है, ताकि वेस्ट यूपी को एशिया का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक हब बनाया जा सके।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का कैलिब्रेशन पूरा होना इस परियोजना के लिए ऐतिहासिक कदम है। दिसंबर से उड़ानें शुरू होने के बाद यह न केवल दिल्ली-एनसीआर के बोझ को कम करेगा, बल्कि देश के एविएशन नेटवर्क को भी और मजबूत बनाएगा। आने वाले समय में यह एयरपोर्ट भारत की नए युग की उड़ान का प्रतीक बनकर उभरेगा। ✈️



