राष्ट्रपति भवन में छठ पूजा का भव्य आयोजन
राष्ट्रपति भवन परिसर इस बार आस्था और परंपरा के रंग में रंगा नजर आया, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वयं सूर्य देव और छठी मैया की पूजा-अर्चना की। लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा का यह आयोजन पूरे उल्लास और श्रद्धा के साथ सम्पन्न हुआ। राष्ट्रपति ने इस अवसर पर देशवासियों की सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए कहा कि छठ पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह प्रकृति और मानव जीवन के बीच सामंजस्य का प्रतीक है।

प्रकृति के प्रति आभार और संरक्षण का संदेश
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संदेश में कहा कि छठ पर्व हमें प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने और उसके संरक्षण की प्रेरणा देता है। यह त्योहार सूर्य देव, जल, वायु और मिट्टी जैसे प्राकृतिक तत्वों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति की पूजा का विशेष महत्व है और छठ पूजा इसी भावना को आगे बढ़ाने वाला पर्व है।
“छठ पर्व हमें सिखाता है कि हम प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर ही जीवन को समृद्ध बना सकते हैं,” – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू।
देशभर में श्रद्धा और उल्लास का माहौल
बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत देश के विभिन्न हिस्सों में छठ पूजा का अद्भुत नजारा देखने को मिला। लाखों श्रद्धालु नदियों, सरोवरों और तालाबों के घाटों पर एकत्र हुए और अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। महिलाएं पारंपरिक गीतों के साथ सूर्य देव की उपासना करती दिखीं।
राजधानी दिल्ली और अन्य शहरों में प्रशासन ने सुरक्षा, सफाई और व्यवस्थाओं के व्यापक इंतजाम किए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
खरना व्रत से शुरू हुआ 36 घंटे का निर्जला उपवास
रविवार की शाम को श्रद्धालुओं ने खरना व्रत संपन्न किया, जो 36 घंटे के निर्जला उपवास की शुरुआत मानी जाती है। इस दौरान भक्त जल और अन्न का सेवन नहीं करते। घर-घर में खरना प्रसाद का वितरण हुआ और लोग एक-दूसरे के घर जाकर प्रसाद ग्रहण करते रहे।
सोमवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया गया, जबकि मंगलवार की सुबह उदयमान सूर्य को अर्घ्य देकर पर्व का समापन हुआ।
लोक आस्था और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक
छठ पूजा को भारत के लोक जीवन से गहराई से जुड़ा पर्व माना जाता है। यह पर्व संयम, श्रद्धा और पर्यावरणीय संतुलन का अद्भुत उदाहरण है। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बावजूद घाटों पर अनुशासन और शांति का वातावरण बना रहा।
जयपुर में राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने भी छठ पूजा में भाग लिया, जिससे इस पर्व की सांस्कृतिक व्यापकता और एकता का संदेश और मजबूत हुआ।
राष्ट्रपति भवन में लोक संस्कृति का सम्मान
राष्ट्रपति भवन में पहली बार इस तरह का आयोजन होने से देशभर में विशेष उत्साह देखा गया। यह आयोजन लोक परंपरा और भारतीय संस्कृति के सम्मान का प्रतीक बन गया।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि भारत की विविधता उसकी ताकत है और ऐसे पर्व हमें एकता, सहयोग और सह-अस्तित्व का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि यह पर्व हर घर में सुख, समृद्धि और शांति लेकर आए तथा हमें पर्यावरण की रक्षा के लिए प्रेरित करे।

समापन: सूर्य उपासना का अनूठा संदेश
छठ पूजा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह मानव और प्रकृति के गहरे संबंध का उत्सव है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा राष्ट्रपति भवन में इस पर्व का आयोजन इस संदेश को और भी सशक्त करता है कि आस्था और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक हैं।
देशभर में मनाए जा रहे इस पर्व ने एक बार फिर यह साबित किया कि भारतीय संस्कृति की जड़ें लोक जीवन और प्रकृति से गहराई से जुड़ी हैं।



