इस्तीफे के बाद शुरू हुआ ‘डिप्टी सीएम कौन?’ का राजनीतिक खेल

बिहार की राजनीति में सोमवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ, जब कैबिनेट की बैठक समाप्त होने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपना इस्तीफा सौंप दिया। उनके इस्तीफे के साथ ही राज्य की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल शुरू हो गया अब उपमुख्यमंत्री कौन बनेगा?

क्योंकि मुख्यमंत्री पद को लेकर अब किसी तरह की गुंजाइश नहीं बची है, ऐसे में 2025 विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा और एनडीए के लिए सबसे अहम दांव डिप्टी सीएम को लेकर है। इस पद पर जातीय संतुलन और महिला प्रतिनिधित्व—दोनों को साधने का दबाव है। भाजपा का फोकस साफ है: एक टिकट, दो फायदे—सवर्ण + महिला या पिछड़ा/अतिपिछड़ा + महिला का कॉम्बिनेशन।

अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि किस चेहरे को उप मुख्यमंत्री बनाकर राजनीतिक संदेश दिया जाएगा। उत्तर लगभग 19 नवंबर तक सामने आ सकता है, लेकिन फिलहाल कई नाम तेज़ी से आगे आ रहे हैं।

महिला उम्मीदवारों में आगे कौन?

भाजपा के केंद्रीय सूत्र बता रहे हैं कि महिला चेहरे को उपमुख्यमंत्री बनाने की तैयारी गंभीरता से चल रही है। इसके तहत दो प्रमुख नाम विशेष रूप से चर्चा में हैं:

1. श्रेयसी सिंह (सवर्ण + महिला कार्ड)

जमुई से विधायक

अंतरराष्ट्रीय स्तर की शूटर और युवा चेहरा

सवर्ण वोट बैंक और महिला प्रतिनिधित्व—दोनों को साधने की क्षमता

पार्टी के भीतर और बाहर लोकप्रिय तथा मोदी-नीतीश दोनों की पसंद बनने की संभावनाएं

भाजपा यदि सवर्ण महिला को आगे लाना चाहेगी तो श्रेयसी सिंह सबसे ऊपर मानी जा रही हैं।

2. रमा निषाद (पिछड़ा/अतिपिछड़ा + महिला कार्ड)

पिछड़ा वर्ग से आने वाली, साधारण परिवार का बैकग्राउंड

भाजपा को समाज के निचले तबकों में मजबूत संदेश देने में मदद

महिलाओं में बराबरी का प्रतिनिधित्व दिखाने का मौका

अगर भाजपा वर्गीय समीकरण और महिला वोट—दोनों को प्राथमिकता दे, तो रमा निषाद पर सट्टा मजबूत हो सकता है।

पुरुष उम्मीदवारों में पिछड़ा वर्ग के नाम

अगर पार्टी उपमुख्यमंत्री पद पुरुष को देना चाहे और वह पिछड़ा समाज से हो, तो दो नाम सबसे आगे बताए जा रहे हैं:

1. रामकृपाल यादव

पाटलिपुत्र के पूर्व सांसद

पिछड़ा समाज में मजबूत पकड़

दिल्ली हाईकमान के करीब

संगठन में भी सक्रिय भूमिका

2. सम्राट चौधरी

वर्तमान उपमुख्यमंत्री

चुनाव अभियान का नेतृत्व इन्होंने ही किया

अनुभव और पहचान—दोनों उनके पक्ष में

पहले भी डिप्टी सीएम रह चुके हैं, यानी पूरा प्रशासनिक अनुभव

सम्राट चौधरी का नाम इसलिए भी मजबूत है क्योंकि उन्होंने हालिया चुनाव में भाजपा के मुख्य चेहरे के रूप में काम किया।

सवर्ण पुरुष नेताओं की लिस्ट

अगर भाजपा महिला की जगह सवर्ण पुरुष कार्ड खेलती है, तो सामने तीन नाम मुख्य रूप से चर्चा में हैं:

1. मंगल पांडेय

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री

नीतीश कुमार के करीबी माने जाते हैं

पार्टी संगठन और कैडर दोनों में मजबूत पकड़

सवर्ण मतदाताओं में अच्छी छवि

अगर भाजपा को नीतीश कुमार के साथ तालमेल को और मजबूत करना हो, तो मंगल पांडेय एक मजबूत विकल्प हैं।

2. विजय सिन्हा

पूर्व उपमुख्यमंत्री

सवर्ण समाज के प्रमुख चेहरे

विधानसभा अध्यक्ष बनाए जाने की भी चर्चा

भाजपा संगठन में भरोसेमंद नेता के रूप में पहचान

उनका नाम दौड़ में है, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका भी उनके लिए समानांतर विकल्प है।

3. रजनीश कुमार

भाजपा विधायक और पूर्व विधान मंडल सचेतक

दिल्ली भाजपा नेतृत्व से नजदीकी

युवा और संगठनात्मक रूप से मजबूत

सोशल-बेस तेजी से बढ़ा

रजनीश कुमार का नाम दिल्ली लॉबी में तेजी से चमक रहा है, जिससे उनकी संभावनाएं भी मजबूत दिखती हैं।

नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल चुका है। मुख्यमंत्री का पद भले ही तय हो गया हो, लेकिन डिप्टी सीएम का पद ही अब अगला बड़ा राजनीतिक संदेश देने वाला है।

जाति समीकरण, महिला प्रतिनिधित्व, भाजपा—जदयू तालमेल और आगामी लोकसभा चुनाव की रणनीति—सब कुछ इसी फैसले से प्रभावित होगा। अब सबकी निगाहें 19 नवंबर पर टिकी हैं, जब तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

कौन बनेगा बिहार का नया डिप्टी सीएम? यह चुनावी रेस अभी बेहद रोचक मोड़ पर है।

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