राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की मौजूदगी में आंतरिक कलह और तीखी बहस

बिहार विधानसभा चुनाव में महज़ छह सीटों पर सिमटने के बाद कांग्रेस पार्टी में गहरी निराशा और आंतरिक कलह देखने को मिली। इसको लेकर दिल्ली में आयोजित समीक्षा बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में जमकर हंगामा हुआ। बैठक का मुख्य मुद्दा चुनाव में पार्टी की कमजोर स्थिति, टिकट वितरण और ‘फ्रेंडली फाइट’ को लेकर विवाद रहा।

फ्रेंडली फाइट और टिकट वितरण पर तीखी बहस

बैठक में कई नेताओं ने खुलकर अपना विरोध जताया। कांग्रेस नेता संजीव सिंह ने कहा कि बिहार में जिस तरह से टिकट बांटे गए, उसी समय हार तय हो गई। जब वह अपने विचार रख रहे थे, तो कुछ नेताओं ने उन्हें टोकना शुरू किया। इस टोक-तोकी के दौरान माहौल इतना गर्म हो गया कि संजीव सिंह ने गुस्से में ‘बहुत बोलोगे तो गोली मार दूंगा’ जैसी चेतावनी तक दे दी। इसके बाद वरिष्ठ नेताओं ने बीच-बचाव कर स्थिति को नियंत्रित किया।

बैठक में मुख्य रूप से टिकट बेचने और फ्रेंडली फाइट के कारण पार्टी को हुए नुकसान को लेकर चर्चा हुई। कई नेताओं ने पप्पू यादव पर आरोप लगाया कि उन्होंने कुछ कांग्रेस प्रत्याशियों को हराने में मदद की। इसके अलावा SIR प्रक्रिया के बाद वोटरों की बढ़ी संख्या का लाभ बीजेपी को मिलने की आशंका जताई गई।

बैठक का स्वरूप और फीडबैक प्रक्रिया

राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और केस वेणुगोपाल ने 10-10 के बैच में नेताओं से व्यक्तिगत फीडबैक लिया। बैठक में विधायक, सांसद और वरिष्ठ पार्टी नेता शामिल हुए। यह फीडबैक सत्र इसलिए अहम था, क्योंकि पार्टी को अगले विधानसभा चुनाव से पहले आंतरिक कमजोरियों और चुनावी रणनीति में सुधार करने की जरूरत थी।

बैठक से पहले जब राहुल गांधी और खड़गे का इंतजार हो रहा था, उसी समय कांग्रेस के उम्मीदवार संजीव सिंह सामने आए। उन्होंने टिकट वितरण और फ्रेंडली फाइट के मुद्दे पर खुलकर विरोध किया, जिसके कारण माहौल और गरम हो गया।

कन्हैया कुमार और नए नेताओं को लेकर सुझाव

बैठक में कुछ नेताओं ने कहा कि बिहार में प्रभाव रखने वाले नेताओं का चुनाव में उपयोग नहीं किया गया, जैसे कन्हैया कुमार। इसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ा। साथ ही, सुझाव दिया गया कि नए और प्रभावशाली नेताओं को आगे लाया जाए, ताकि पार्टी की स्थिति मजबूत हो।

कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि आरजेडी के साथ देर से गठबंधन और सीट बंटवारे में समय लेने के कारण पार्टी की स्थिति और कमजोर हुई। बैठक में RJD से गठबंधन तोड़ने और खुद को मजबूत करने की राय भी सामने आई।

सीमांचल और मुस्लिम वोटों का मुद्दा

बैठक में यह भी उठाया गया कि असदुद्दीन ओवैसी की उपस्थिति के कारण सीमांचल क्षेत्र में मुस्लिम वोटरों के महागठबंधन को वोट न देने की संभावना थी। राहुल गांधी ने बैठक के दौरान कहा कि किसी पर आरोप लगाने की बजाय अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों की स्थिति और सुधार पर ध्यान देना चाहिए।

बिहार चुनाव में खराब प्रदर्शन और टिकट वितरण से पैदा हुई आंतरिक कलह कांग्रेस के लिए चेतावनी है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा उठाए गए मुद्दे—फ्रेंडली फाइट, गठबंधन की देरी, और नए नेताओं को आगे लाने की जरूरत—अगले चुनाव में रणनीति सुधार का मार्ग दिखाते हैं।

राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की इस बैठक से पार्टी की कोशिश रही कि आंतरिक मतभेदों को दूर किया जाए और आगामी विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयारियाँ की जाएँ। हालांकि, बैठक में हंगामा, गाली-गलौज और विवाद ने यह भी दिखा दिया कि कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक सुधार और नेतृत्व की सक्रिय भागीदारी अब और जरूरी हो गई है।

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