सीएम योगी‑रॉयल कमांड: “जहाँ भी रक्षा भूमि की जरूरत पड़ेगी, यूपी देगा जमीन”
उत्तर प्रदेश के लखनऊ में स्थित नया उत्पादन‑यूनिट शनिवार को पहली खेप ब्रहमोस मिसाइलों के रवाने का संरक्षण रही। इस अवसर पर रक्षा मंत्री एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री ने संयुक्त रूप सेहरी झंडी दिखाते हुए इस निशानियों से संकेत दिया कि राज्य ‘मेक इन इंडिया’ व ‘स्वदेशी रक्षा उत्पादन’ के संकल्प में पूरा साथ दे रहा है।
उत्पादन का नया केंद्र: लखनऊ का महत्व
यह यूनिट सारोजिनी नगर‑भटगाँव में स्थित है, जो उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (UPDIC) के अंग के रूप में बनाई गई है। राज्य सरकार ने इस परियोजना के लिए लगभग 80 हेक्टेयर मुफ्त भूमि उपलब्ध कराई, और लगभग ₹300 करोड़ की निवेश लागत से यह केन्द्र विकसित हुआ। यूनिट की स्थापना और परीक्षण प्रक्रिया प्रशासन‑उद्योग‑रक्षा तंत्र के समन्वय का उदाहरण है।
मुख्यमंत्री योगी का संदेश: भूमि और समर्थन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह मिसाइल स्वदेशी तकनीक का प्रतीक है, और राज्य सरकार पूरी तैयारी के साथ है कि जहाँ भी रक्षा‑भूमि की जरूरत पड़ेगी, उत्तर प्रदेश दिल खोलकर जमीन देगा। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने ऐसे प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी दे दी है जिसमें बिना लागत के भूमि हस्तांतरण का निर्णय लिया गया था। यह नीति रक्षा उत्पादन को आसान बनाने के उद्देश्य से है।
रणनीतिक आत्मनिर्भरता का संकेत
रक्षा मंत्री ने इस मौके पर कहा कि यह दिन सिर्फ निर्माण का नहीं, बल्कि देश की रक्षा क्षमता में आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि यह यूनिट लखनऊ को सिर्फ औद्योगिक केंद्र नहीं, बल्कि रक्षा निर्माण का हब बनाएगी। श्रीमान योगी‑सिंह दोनों ने यह स्पष्ट किया कि राज्य व केंद्र मिलकर देश को सुरक्षा‑ऊर्जा संपन्न बनाने पर काम कर रहे हैं।
अवसर और चुनौती दोनों
इस निर्माण‑योजना का अर्थ है:
उच्च कौशल रोजगार – इंजीनियरों, तकनीशियनों को नए अवसर मिलेंगे।
उपकरण एवं आपूर्ति‑श्रृंखला – राज्य में रक्षा‑संगठन‑उपकरण निर्माण का नेटवर्क बढ़ेगा।
निर्यात संभावनाएँ – आने वाले वर्षों में इस यूनिट से सैन्य उत्पादन के साथ निर्यात क्षमता भी विकसित हो सकती है।
फिर भी चुनौतियाँ कम नहीं हैं: गुणवत्ता नियंत्रण, निर्यात नियम, साइबर‑सुरक्षा व उत्पादन स्थिरता इनमें शामिल हैं।



