मौनी अमावस्या के बाद से प्रशासन से नाराज़गी, बुखार के बावजूद जारी है धरना
प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि वह बीते छह दिनों से धरने पर बैठे हुए हैं और इसी दौरान उन्हें बुखार हो गया है। मौनी अमावस्या के दिन से ही वे प्रशासन के रवैये से नाराज़ होकर अपने शिविर में लौटने के बजाय धरना दे रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद दिन में केवल दो बार पालकी में बाहर आए हैं, जबकि अधिकांश समय वे अपने वैन में ही आराम कर रहे हैं। चिकित्सकीय निगरानी में उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है, लेकिन लंबे समय से चल रहे धरने के कारण उनकी सेहत को लेकर शिष्य और श्रद्धालु चिंतित हैं।
संगम स्नान को लेकर शुरू हुआ विवाद
पूरा विवाद मौनी अमावस्या के दिन संगम स्नान को लेकर शुरू हुआ। शंकराचार्य का आरोप है कि उस दिन उन्हें पालकी में संगम स्नान के लिए जाने से रोका गया। इस दौरान उनके शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की भी हुई। इसी घटना से आहत होकर उन्होंने तत्काल धरने पर बैठने का फैसला लिया और तब से वे वहीं डटे हुए हैं। शंकराचार्य ने साफ कहा है कि जब तक प्रशासन सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगता, तब तक वे वसंत पंचमी का स्नान नहीं करेंगे। उनका कहना है कि संत समाज का सम्मान सर्वोपरि है और इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं हो सकता।
सवा लाख शिवलिंग स्थापना का कार्य अधूरा
इस धरने का असर धार्मिक कार्यक्रमों पर भी पड़ा है। जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ के लक्षेश्वर धाम में सवा लाख शिवलिंगों की स्थापना प्रस्तावित थी। इस महायोजना के तहत शिवलिंगों को पहले प्रयागराज लाकर श्रद्धालुओं के दर्शन और विधिवत पूजन की व्यवस्था की जानी थी। हालांकि वर्तमान स्थिति यह है कि शंकराचार्य स्वयं शिविर से बाहर धरने पर हैं, जबकि शिविर के भीतर रखे शिवलिंग साधना और पूजन की प्रतीक्षा में हैं। बताया जा रहा है कि सवा लाख में से केवल कुछ शिवलिंग ही प्रयागराज पहुंच पाए हैं, जबकि शेष अभी भी कार्टूनों में पैक हैं। शिवलिंगों की एक और खेप भी आनी थी, जो अब तक नहीं पहुंच सकी है। जब श्रद्धालु शिवलिंगों को इस अवस्था में देखते हैं, तो उनके बीच नाराज़गी और आक्रोश भी देखने को मिल रहा है। कई भक्तों का कहना है कि यह आयोजन आस्था से जुड़ा है और इसमें किसी भी तरह की अव्यवस्था दुखद है।
प्रशासन और संत समाज की अपील
विवाद को सुलझाने के प्रयास भी जारी हैं। उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने शंकराचार्य से धरना समाप्त करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। प्रशासन की ओर से भी यह संकेत दिए गए हैं कि मामले को सम्मानजनक तरीके से सुलझाया जाना चाहिए। वहीं, संत समाज की ओर से भी शांति और संयम बरतने की अपील सामने आई है। नासिक से महंत रामस्नेही दास और महंत बैजनाथ ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में टकराव की बजाय संवाद और आपसी समझ का रास्ता अपनाना चाहिए। उनका कहना है कि संतों और प्रशासन के बीच सम्मानजनक बातचीत से ही स्थायी समाधान निकल सकता है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और शंकराचार्य के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है। एक ओर जहां शंकराचार्य की सेहत चिंता का विषय बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा यह मामला जल्द सुलझने की उम्मीद की जा रही है। माघ मेले जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में संत समाज और प्रशासन के बीच संतुलन और सम्मान बनाए रखना सभी के लिए जरूरी माना जा रहा है।
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